सुविचार-सुन्दरकाण्ड-45
जय श्री राधे कृष्ण ……. जुगुति विभीषन सकल सुनाई, चलेउ पवन सुत बिदा कराई, करि सोइ रुप गयउ पुनि तहवां, बन अशोक सीता रह जहवां….!! भावार्थ:- विभीषण ने (माता के दर्शन की) सब युक्तियां (उपाय) कह सुनाईं। तब हनुमान जी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. जुगुति विभीषन सकल सुनाई, चलेउ पवन सुत बिदा कराई, करि सोइ रुप गयउ पुनि तहवां, बन अशोक सीता रह जहवां….!! भावार्थ:- विभीषण ने (माता के दर्शन की) सब युक्तियां (उपाय) कह सुनाईं। तब हनुमान जी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. पुनि सब कथा बिभीषन कही, जेहि बिधि जनकसुता तहं रही, तब हनुमंत कहा सुनु भ्राता, देखी चहउँ जानकी माता ….!! भावार्थ:- फिर विभीषण जी ने श्री जानकी जी जिस प्रकार वहां (श्रीलंका में) रहती थीं,...
जय श्री राधे कृष्ण ……. जानत हूं अस स्वामि बिसारी, फिरहि ते काहे न होहि दुखारी, एहि बिधि कहत राम गुन ग्रामा, पावा अनिर्बाच्य विश्रामा…..!! भावार्थ:- जो जानते हुए भी ऐसे स्वामी श्री रघुनाथ जी को भुलाकर (विषयों के पीछे)...
जय श्री राधे कृष्ण ……. अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर, कीन्ही कृपा सुमिरि गुन भरे बिलोचन नीर.. !! भावार्थ:- हे सखा! सुनिये, मैं ऐसा अधम हूँ, पर श्री राम चन्द्र जी ने तो मुझ पर भी कृपा...
जय श्री राधे कृष्ण ……. कहहु कवन मैं परम कुलीना, कपि चंचल सबहीं बिधि हीना, प्रात लेइ जो नाम हमारा, तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा….!! भावार्थ:- भला कहिये, मै ही कौन बड़ा कुलीन हूँ ? (जाति का) चंचल वानर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. *पिता कभी नहीं कहते कि मेरे पास पैसे नहीं है और मांँ कभी नहीं कहती कि आज मेरी तबियत खराब है बस इन्हीं दो झूठ की वजह से दुनियां इतनी सुंदर बनीं हुई है…!! सुप्रभात...
जय श्री राधे कृष्ण ……. जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा, तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा, सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती, करहिं सदा सेवक पर प्रीती….!! भावार्थ:- जब श्री रघुवीर ने कृपा की है, तभी तो आपने मुझे हठ करके (अपनी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. तामस तनु कछु साधन नाहीं, प्रीति न पद सरोज मन माहीं, अब मोहि भा भरोस हनुमंता बिनु हरि कृपा मिलहि नहि संता…..!! भावार्थ:- मेरा तामसी (राक्षस) शरीर होने से साधन तो कुछ बनता नहीं, और...
जय श्री राधे कृष्ण ……. सुनहु पवनसुत रहनि हमारी, जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी, तात कबहु मोहि जानि अनाथा, करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा…..!! भावार्थ:- विभीषण जी ने कहा, हे पवनपुत्र, मेरी रहनी सुनो । मैं यहां वैसे ही रहता हूँ,...
जय श्री राधे कृष्ण ……. तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम, सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम….!! भावार्थ:- तब हनुमान जी ने श्री रामचंद्र जी की सारी कथा कह कर अपना नाम बताया । सुनते...