हनुमान चालीसा की महिमा
मेरे रिश्तेदार की पौत्री को मधुमेह रोग है। वह इंसुलिन का इंजेक्शन लेती है, परंतु एक दिन जब वह परीक्षा देने के लिये कॉलेज गयी थी, अचानक सुगर-लेवल बढ़ गया। उसे पास के अस्पताल में दिखाया गया। उन लोगों ने कहा, ‘हमारे पास समुचित व्यवस्था नहीं है। आप इसे बड़े अस्पताल में दिखायें।’
उसे एम्बुलेंस द्वारा नगर के एक बड़े अस्पताल में ले जाया गया। वहाँ पर डाक्टरों ने केस को हलके में लिया। अनावश्यक टेस्ट और सिर्फ मोटी फीस की उगाही के लिये केस को लम्बा खींचा गया। लड़की लम्बे समय तक बेहोश रही। ऐसे में डॉक्टरों से अपेक्षा होती है कि वे मरीज और उसके परिजनों को धैर्य बँधायें, परंतु जब उन्हें उनके रूखे और अमानवीय व्यवहार के लिये फटकार लगायी गयी और तब उनका जवाब था- ‘देखना वह रिस्पाण्ड (प्रतिक्रिया) नहीं करेगी।’
यह सब देखकर मरीज के परिजनों पर क्या बीत रही होगी, इसकी कल्पना कठिन है। तब हनुमान्जी को गुहार लगायी गयी। ‘दीनदयाल बिरदु सँभारी। हरहुँ नाथ मम संकट भारी ॥’ सच्चे मन से हनुमान चालीसा का अनवरत पाठ शुरू किया गया। ‘संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।’ का सम्पुट लगाया गया।
हनुमान्जी की कृपा हुई। लड़की को होश आ गया। सभी की जान में जान आयी। सारी रिपोर्ट नार्मल रही और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल गयी। यह है हनुमान्जी की कृपा !
[ श्रीगजाननजी पाण्डेय ]
कल्याण गौरखपुर
जय श्रीराम
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कल्याण का हनुमान अंक पढें।।।
जय सियाराम।।।