आज के संदर्भ में श्री कृष्ण चरित्र
आज के संदर्भ में श्री कृष्ण चरित्र कृष्ण और बलराम दो भाई हैं। सारे जीवन परछाई की तरह साथ रहे लेकिन पांडव- कौरवों में क्या चल रहा है, ये बलराम कभी नहीं समझ पाए। उन्होंने दुर्योधन को गदा सिखाई फिर...
आज के संदर्भ में श्री कृष्ण चरित्र कृष्ण और बलराम दो भाई हैं। सारे जीवन परछाई की तरह साथ रहे लेकिन पांडव- कौरवों में क्या चल रहा है, ये बलराम कभी नहीं समझ पाए। उन्होंने दुर्योधन को गदा सिखाई फिर...
बुद्धि का भ्रम एक सज्जन का नियम था कि प्रतिदिन तीन ग़रीब लोगों को भोजन कराने के पश्चात् ही स्वयं भोजन करते थे। एक दिन बहुत खोजने पर भी कोई ग़रीब न मिला। दोपहर हो गई। त्योहार निकट थी। दुकानों...
ईंटों के बीच दबे सपने एक छोटे से कस्बे में बारह वर्षीय अर्जुन रहता था। उसकी आँखों में बड़े-बड़े सपने थे। वह पढ़-लिखकर अधिकारी बनना चाहता था ताकि अपने गाँव की तस्वीर बदल सके। लेकिन गरीबी ने उसके सपनों को...
मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास सरस्वती विद्या स्कूल में आठवीं कक्षा के दो विद्यार्थी पढ़ते थे—शैतान सिंह और अभिलाषा। दोनों एक ही कक्षा में थे, लेकिन उनके स्वभाव बिल्कुल अलग थे। शैतान सिंह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन पढ़ाई को गंभीरता से...
साधना का प्रताप पुराने समय की बात है एक आश्रम में बहुत से शिष्य रहते थे और वह सब आपस में बातें किया करते थे कि मुझे आज ऐसा अनुभव हुआ, कोई कहता मुझे इस तरह का अनुभव हुआ, हर...
लालच बुरी बलाय गाँव में एक नाई अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। नाई ईमानदार था, अपनी कमाई से संतुष्ट था। उसे किसी तरह का लालच नहीं था। नाई की पत्नी भी अपनी पति की कमाई हुई आय...
गुरु पूर्णिमा विशेष एक समय एक आश्रम में एक गुरू के सैकड़ों शिष्य एकत्रित हुए। वे वहाँ अपने गुरू की एक झलक पाने, उनके ज्ञानपूर्ण वचन को सुनने और ध्यान आदि सीखने के लिए एकत्रित हुए थे। विशेषत: वे सभी...
पालनहार एक समय लक्ष्मी जी विष्णु जी को भोजन करा रही थी ,विष्णु जी ने पहला ग्रास मुंह में लेने से पहले ही हाथ रोक लिया, और उठ कर चले गए ।लौट कर आने पर भोजन करते करते लक्ष्मी जी...
कल पर टली खुशियाँ राजस्थान के छोटे से गाँव में बबलू और उसकी पत्नी प्रमिला अपने दो बच्चों के साथ एक सादा लेकिन खुशहाल जीवन जीते थे। बबलू मेहनती किसान था। सुबह सूरज निकलने से पहले खेतों में चला जाता...
प्रभु जगन्नाथ ओडिशा के पवित्र नगर पुरी में, जहाँ समुद्र की लहरें भी मानो "जय जगन्नाथ" का जाप करती थीं, वहीं भगवान जगन्नाथ का विशाल मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र था। हर सुबह मंदिर की घंटियाँ बजते ही...