lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-43

294Views

जय श्री राधे कृष्ण …….

जानत हूं अस स्वामि बिसारी, फिरहि ते काहे न होहि दुखारी, एहि बिधि कहत राम गुन ग्रामा, पावा अनिर्बाच्य विश्रामा…..!!

भावार्थ:- जो जानते हुए भी ऐसे स्वामी श्री रघुनाथ जी को भुलाकर (विषयों के पीछे) भटकते फिरते हैं वह दुखी क्यों न हों ? इस प्रकार श्री राम जी के गुण समूहों को कहते हुए उन्होंने अनिर्वचनीय (परम) शांति प्राप्त की……!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply