सुविचार-सुन्दरकाण्ड-139
जय श्री राधे कृष्ण ……. "तात मातु हि सुनिअ पुकारा, एहिं अवसर को हमहि उबारा, हम जो कहा यह कपि नहिं होई, बानर रूप धरें सुर कोई ।। भावार्थ:- हाय बप्पा! हाय मैया! इस अवसर पर हमें कौन बचाएगा ?...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "तात मातु हि सुनिअ पुकारा, एहिं अवसर को हमहि उबारा, हम जो कहा यह कपि नहिं होई, बानर रूप धरें सुर कोई ।। भावार्थ:- हाय बप्पा! हाय मैया! इस अवसर पर हमें कौन बचाएगा ?...
सच्चा न्याय एक बार एक राजा शिकार खेलने गया उसका तीर लगने से जंगलवासियों में से किसी का बच्चा मर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "देह बिसाल परम हरुआई, मंदिर तें मंन्दिर चढ़ धाई, जरइ नगर भा लोग बिहाला, झपट...
पारिवारिक संस्कार व अनुशासन उन महिलाओं के विषय में तो बहुत कुछ लिखा गया है, जो ससुराल में पीड़ित...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारींं, भईं सभीत निसाचर नारीं ।। भावार्थ:- बन्धन से निकल कर...
अर्जित संपत्ति- मान सम्मान “माँ आपको तो चाची जी को इतनी देर तक बिठाना ही नहीं चाहिए था उपर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "बाजहिं ढोल देहिं सब तारी, नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी, पावक जरत देखि हनुमंता, भयहु...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "रहा न नगर बसन घृत तेला, बाढ़ी पूँछ कीन्ह कपि खेला, कौतुक कँह आए पुरबासी,...
लव-कुश-द्वारा-हनुमानजी को बंदी बनाना श्रीरामश्वमेध का अश्व भ्रमण करता हुआ महर्षि वाल्मीकि के पुनीत आश्रम के समीप पहुंचा| प्रातःकाल का...