जय श्री राधे कृष्ण …….
“बाजहिं ढोल देहिं सब तारी, नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी, पावक जरत देखि हनुमंता, भयहु परम लघु रूप तुरंता ।।
भावार्थ:- ढोल बजते हैं, सब लोग तालियाँ पीटते हैं । हनुमान जी को नगर में फिरा कर, फिर पूँछ में आग लगा दी । अग्नि को जलते हुए देख कर हनुमान जी तुरंत ही बहुत छोटे रुप में हो गये… ।।
सुप्रभात
आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..
