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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-136

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जय श्री राधे कृष्ण …….

बाजहिं ढोल देहिं सब तारी, नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी, पावक जरत देखि हनुमंता, भयहु परम लघु रूप तुरंता ।।

भावार्थ:- ढोल बजते हैं, सब लोग तालियाँ पीटते हैं । हनुमान जी को नगर में फिरा कर, फिर पूँछ में आग लगा दी । अग्नि को जलते हुए देख कर हनुमान जी तुरंत ही बहुत छोटे रुप में हो गये… ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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