lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-137

233Views

जय श्री राधे कृष्ण …….

निबुकि चढ़ेउ कपि कनक अटारींं, भईं सभीत निसाचर नारीं ।।

भावार्थ:- बन्धन से निकल कर वे सोने की अटारियों पर जा चढ़े । उनको देखकर राक्षसों की स्त्रियाँ भयभीत हो गयीं ।।

हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास, अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास ।।

भावार्थ:- उस समय भगवान की प्रेरणा से उनचासों पवन चलने लगे । हनुमान जी अट्टहास कर के गरजे और बढ़ कर आकाश से जा लगे…. ।।

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

Leave a Reply