सुविचार-सुन्दरकाण्ड-144
जय श्री राधे कृष्ण ……. "कहेहु तात अस मोर प्रनामा, सब प्रकार प्रभु पूरनकामा, दीन दयाल बिरिदु संभारी, हरहु नाथ मम संकट भारी ।। भावार्थ:- (जानकी जी ने कहा), हे तात! मेरा प्रणाम निवेदन करना और इस प्रकार कहना -...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "कहेहु तात अस मोर प्रनामा, सब प्रकार प्रभु पूरनकामा, दीन दयाल बिरिदु संभारी, हरहु नाथ मम संकट भारी ।। भावार्थ:- (जानकी जी ने कहा), हे तात! मेरा प्रणाम निवेदन करना और इस प्रकार कहना -...
समर्पण में है सफलता है पुराने समय की बात है। एक ब्रह्मचारी ने कई विद्याओं का अध्ययन पूर्ण कर लिया...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा, जैसें रघुनायक मोहि दीन्हा, चूड़ामनि उतारि तब दयऊ, हरष समेत...
अच्छा बेटा या अच्छा पति पंद्रह घंटे का थकान भरा सफर कर चंचल अपने छोटे भाई समीर की शादी अटेंड...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "पूँछ बुझाइ खोइ श्रम धरि लघु रूप बहोरि, जनकसुता के आगें ठाढ़ भयउ कर जोरि...
देवी सती ने ली राम जी की परिक्षा एक बार त्रेतायुग में भोले बाबा अपनी (पहली) पत्नी जगत जननी माता...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "ता कर दूत अनल जेहिं सिरजा, जरा न सो तेहि कारन गिरिजा, उलटि पलटि लंका...
लक्ष्य प्राप्ति की राह एक किसान के घर एक दिन उसका कोई परिचित मिलने आया। उस समय वह घर पर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "*साधु अवग्या कर फलु ऐसा, जरइ नगर अनाथ कर जैसा, जारा नगरु निमिष एक माहीं,...
मिट्टी का खिलौना – एक गांव में एक कुम्हार रहता था, वो मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाया करता था,...