मोक्ष की तलाश
मोक्ष की तलाश मैं अपने बीमार और वृद्ध पिता को काशी के मुक्ति भवन ले जा रहा था। मन में एक ही उम्मीद थी—शायद वहाँ जाकर उनका जल्दी देहांत हो जाए। ऐसा नहीं था कि मैं वहाँ जाना चाहता था।...
मोक्ष की तलाश मैं अपने बीमार और वृद्ध पिता को काशी के मुक्ति भवन ले जा रहा था। मन में एक ही उम्मीद थी—शायद वहाँ जाकर उनका जल्दी देहांत हो जाए। ऐसा नहीं था कि मैं वहाँ जाना चाहता था।...
मजिस्ट्रेट का दूरदर्शी निर्णय स्वामी से अलग होने की ज़िद लेकर एक महिला मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई। पति भी भयभीत अवस्था में उपस्थित हुआ। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनकर मजिस्ट्रेट महोदया ने सिर पकड़ लिया। सिरदर्द की...
नौकरी, हमारा पूरा जीवन नहीं है राघव हर सुबह सबसे पहले ऑफिस पहुँचता था और सबसे आख़िर में निकलता था। उसे लगता था कि जितना ज़्यादा समय वह काम को देगा, उतना ही सफल होगा। धीरे-धीरे उसकी ज़िंदगी का हर...
मोह का बंधन बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य में रघुवीर सिंह नाम का राजा राज करता था। वह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसे अपने खजाने पर बड़ा गर्व था। उसने वर्षों की मेहनत से अपार धन-संपत्ति इकट्ठा...
कर्म से भाग्य बदल जाता है जब भगवान् श्री कृष्ण ने सुदामा जी को तीनों लोकों का स्वामी बना दिया तो, सुदामा जी की संपत्ति देखकर यमराज से रहा न गया और यम भगवान् को नियम कानूनों का पाठ पढ़ाने...
बर्फ का टुकड़ा, रिश्तों की गर्माहट नगर के एक शांत मोहल्ले में किशोरी देवी अपने बेटे और बहू प्रमिला के साथ रहती थीं। किशोरी देवी का स्वभाव बहुत सरल और दयालु था। वे मानती थीं कि पड़ोसी केवल आसपास रहने...
अतिथि देवो भव एक छोटे से गाँव में एक गरीब माँ अपने छोटे बच्चे के साथ रहती थी। गरीबी जरूर थी, लेकिन माँ ने अपने बच्चे को बचपन से ही एक बात सिखाई थी— “बेटा, हमारे यहाँ अतिथि को भगवान...
मदद और दया सबसे बड़ा धर्म किशोर नाम का एक लड़का था जो बहुत गरीब था। दिन भर कड़ी मेहनत के बाद जंगल से लकड़ियाँ काट के लाता और उन्हें जंगल में बेचा करता। एक दिन किशोर सिर पर लकड़ियों...
बूढ़े पिता का दर्द राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के एक छोटे से गाँव में रामनारायण नाम का एक बुज़ुर्ग व्यक्ति रहता था। उसका जीवन बहुत संघर्षों से भरा रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर हमेशा संतोष और स्नेह झलकता था।...
पीढ़ियां अहसान नहीं मानती दुबे जी को गए अभी पंद्रह दिन भी पूरे नहीं हुए थे। घर के बाहर एक कबाड़ी खड़ा था। अंदर वही सामान तौला जा रहा था, जिसे दुबे जी ने अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई और...