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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-115

जय श्री राधे कृष्ण ……. "धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता, तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता, हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा, तेहि समेत नृप दल मद गंजा ।। भावार्थ:- जो देवताओं की रक्षा के लिए नाना प्रकार की देह धारण करते...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-114

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जाकें बल बिरंचि हरि ईसा, पालत सृजत हरत दससीसा, जा बल सीस धरत सहसानन, अंडकोस समेत गिरि कानन ।। भावार्थ:- जिन के बल से हे दसशीश !, ब्रह्मा, विष्णु, महेश (क्रमशः) सृष्टि का सृजन, पालन...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-113

जय श्री राधे कृष्ण ……. "मारे निशिचर केहिं अपराधा, कहु सठ तोहि न प्रान कइ बाधा, सुनु रावन ब्रह्मांड निकाया, पाइ जासु बल बिरचति माया…..।। भावार्थ:- तूने किस अपराध से राक्षसों को मारा ? रे मूर्ख! बता, क्या तुझे प्राण...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-112

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कह लंकेश कवन तैं कीसा, केहि के बल घालेहिं बन खीसा, की धौं श्रवन सुनेहि नहिं मोही, देखउं अति असंक सठ तोही ।। भावार्थ:- लंकापति रावण ने कहा - रे वानर! तू कौन है ?...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-111

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद, सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद…..।। भावार्थ:- हनुमान जी को देख कर रावण दुर्वचन कहता हुआ खूब हंसा । फिर पुत्र वध का स्मरण किया तो उस...

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हैसियत

हैसियत…. विनोद कुमार जैसे ही दुकान में घुसे दुकान के मालिक बृजमोहन ने उन्हें आदर से बिठाया और उनके मना करने के बावजूद लड़के को चाय लेने के लिए भेज दिया..उसके बाद बृजमोहन ने पूछा, “कहिए विनोद बाबू क्या सेवा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-110

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कर जोरे सुर दिसिप बिनीता, भृकुटि बिलोकत सकल सभीता, देखि प्रताप न कपि मन संका, जिमि अहिगन महुँ गरुड़ असंका ।। भावार्थ:- देवता और दिक्पाल हाथ जोड़े बड़ी नम्रता के साथ भयभीत हुए सब रावण...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-109

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कपि बंधन सुनि निसिचर धाए, कौतुक लागि सभा सब आए, दसमुख सभा दीखि कपि जाई, कहि न जाइ कछु अति प्रभुताई ।। भावार्थ:- बंदर को बांधा जाना सुन कर राक्षस दौड़े और कौतुक के लिए...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-108

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जासु नाम जपि सुनहु भवानी, भव बंधन काटहिं नर ग्यानी, तासु दूत कि बंध तरु आवा, प्रभु कारज लगि कपिहिं बंधावा ।। भावार्थ:- (शिवजी कहते हैं) हे भवानी! सुनो, जिन का नाम जप कर ज्ञानी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-107

जय श्री राधे कृष्ण ……. "ब्रम्हबान कपि कहुँ तेहिं मारा, परितिहुं बार कटक संघारा, तेहिं देखा कपि मुरुछित भयऊ, नागपास बांधेसि लै गयऊ ।। भावार्थ:- उसने हनुमान जी को ब्रह्म बाण मारा, जिसके लगते ही वे वृक्ष से नीचे गिर...

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