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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-109

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जय श्री राधे कृष्ण …….

कपि बंधन सुनि निसिचर धाए, कौतुक लागि सभा सब आए, दसमुख सभा दीखि कपि जाई, कहि न जाइ कछु अति प्रभुताई ।।

भावार्थ:– बंदर को बांधा जाना सुन कर राक्षस दौड़े और कौतुक के लिए (तमाशा देखने के लिए) सब सभा में आये । हनुमान जी ने जा कर रावण की सभा देखी । उसकी अत्य॔त प्रभुता (ऐश्वर्य) कुछ कही नहीं जाती…….!!

महाशिवरात्रि की शुभकामनायें

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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