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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-246

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बरु भल बास नरक कर ताता, दुष्ट संग जनि देइ बिधाता, अब पद देखि कुसल रघुराया, जौं तुम्ह कीन्हि जानि जन दाया *।। भावार्थ:- हे तात! नरक में रहना वरन् अच्छा है, परंतु विधाता दुष्ट...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-245

जय श्री राधे कृष्ण ….. "*खल मंडली बसहु दिन राती, सखा धरम निबहइ केहि भाँती, मै जानउँ तुम्हारि सब रीती, अति नय निपुन न भाव अनीती ।। भावार्थ:- दिन-रात दुष्टों की मंडली में बसते हो । (ऐसी दशा में) हे...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-244

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी, बोले बचन भगत भयहारी, कहु लंकेस सहित परिवारा, कुसल कुठाहर बास तुम्हारा ।। भावार्थ:- छोटे भाई लक्ष्मण जी सहित गले मिल कर उन को अपने पास बैठा कर श्री राम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-243

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अस कहि करत दंडवत देखा, तुरत उठे प्रभु हरष बिसेषा, दीन बचन सुनि प्रभु मन भावा, भुज बिसाल गहि हृदयँ लगावा ।। भावार्थ:- प्रभु ने उन्हें ऐसा कह कर दण्डवत करते देखा तो वे अत्यन्त...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-242

जय श्री राधे कृष्ण ….. "श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर,त्राहि त्राहि आरति हरन सरन सुखद रघुबीर ।। भावार्थ:- मैं कानों से आप का सुयश सुनकर आया हूँ कि प्रभु भव (जन्म-मरण) के भय का नाश करने वाले...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-241

जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाथ दसानन कर मैं भ्राता, निसिचर बंस जनम सुरत्राता, सहज पापप्रिय तामस देहा, जथा उलूकहि तम पर नेहा ।। भावार्थ:- हे नाथ ! मैं दशमुख रावण का भाई हूँ । हे देवताओं के रक्षक !...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-240

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सिंघ कंध आयत उर सोहा, आनन अमित मदन मन मोहा, नयन नीर पुलकित अति गाता, मन धरि धीर कही मृदु बाता ।। भावार्थ:- सिंह के से कंधे हैं, विशाल वक्ष:स्थल (चौड़ी छाती) अत्यन्त शोभा दे...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-239

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बहुरि राम छबिधाम बिलोकी, रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी, भुज प्रलंब कंजारुन लोचन, स्यामल गात प्रनत भय मोचन ।। भावार्थ:- फिर शोभा के धाम श्री राम जी को देख कर वे पलक (मारना) रोक कर...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-238

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सादर तेहिं आगें करि बानर, चले जहाँ रघुपति करुनाकर, दूरिहि ते देखे द्वौ भ्राता, नयनानंद दान के दाता।। भावार्थ:- विभीषण जी को आदर सहित आगे कर के वानर फिर वहाँ चले, जहाँ करूणा की खान...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-237

जय श्री राधे कृष्ण ….. "उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत, जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत ।। भावार्थ:- कृपा के धाम श्री राम जी ने हँस कर कहा - दोनों ही स्थितियों में उसे ले आओ...

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