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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-241

जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाथ दसानन कर मैं भ्राता, निसिचर बंस जनम सुरत्राता, सहज पापप्रिय तामस देहा, जथा उलूकहि तम पर नेहा ।। भावार्थ:- हे नाथ ! मैं दशमुख रावण का भाई हूँ । हे देवताओं के रक्षक !...

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“हां….यही प्यार है….

"हां....यही प्यार है.... लीजिए आपका नींबू पानी.....मुस्कुराते हुए सुधा ने रोज की तरह मार्निंग वाक से लौटे अपने पति मोहन से कहा थैंक्स यार .... कहते हुए मोहन ने भी मुस्कुराते हुए नींबू पानी लिया और घट घट करते हुए...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-240

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सिंघ कंध आयत उर सोहा, आनन अमित मदन मन मोहा, नयन नीर पुलकित अति गाता, मन धरि धीर कही मृदु बाता ।। भावार्थ:- सिंह के से कंधे हैं, विशाल वक्ष:स्थल (चौड़ी छाती) अत्यन्त शोभा दे...

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मायका हमेशा सलामत रहे

मायका हमेशा सलामत रहे माँ के स्वर्ग सिधारने के बाद जब तेरहवी भी निमट गई तब नम आँखों से चारु ने अपने भाई से विदा ली।" सब काम निमट गये भैया माँ चली गई अब मैं चलती हूँ भैया !"...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-239

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बहुरि राम छबिधाम बिलोकी, रहेउ ठटुकि एकटक पल रोकी, भुज प्रलंब कंजारुन लोचन, स्यामल गात प्रनत भय मोचन ।। भावार्थ:- फिर शोभा के धाम श्री राम जी को देख कर वे पलक (मारना) रोक कर...

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प्रेम और स्वास्थ्य

प्रेम और स्वास्थ्य आज हर मनुष्य को कोई ना कोई रोग लगा हुआ है । एक रोग का इलाज करवाते है तो दूसरा  रोग उठ खड़ा  होता है ।  रोग की  जड़ हमारे विचार  है ।  मुझे जल्दी सर्दी हो...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-238

जय श्री राधे कृष्ण ….. "सादर तेहिं आगें करि बानर, चले जहाँ रघुपति करुनाकर, दूरिहि ते देखे द्वौ भ्राता, नयनानंद दान के दाता।। भावार्थ:- विभीषण जी को आदर सहित आगे कर के वानर फिर वहाँ चले, जहाँ करूणा की खान...

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सुख का आधार

सुख का आधार जिस प्रकार वृक्षारोपण करने से आपको शीतल छाया स्वतः प्राप्त हो जाती है उसी प्रकार शुभ कार्य करने से समय आने पर सुख की प्राप्ति भी स्वतः हो जाती है। हमारे द्वारा संपन्न ऐसा कोई शुभ और...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-237

जय श्री राधे कृष्ण ….. "उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत, जय कृपाल कहि कपि चले अंगद हनू समेत ।। भावार्थ:- कृपा के धाम श्री राम जी ने हँस कर कहा - दोनों ही स्थितियों में उसे ले आओ...

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निशान ही निशान

निशान ही निशान कुछ दिन पहले एक परिचित के घर गया था। जिस वक्त घर में मैं बैठा था, उनकी मेड घर की सफाई कर रही थी। मैं ड्राइंग रूम में बैठा था, मेरे परिचित फोन पर किसी से बात...

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