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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-240

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जय श्री राधे कृष्ण …..

“सिंघ कंध आयत उर सोहा, आनन अमित मदन मन मोहा, नयन नीर पुलकित अति गाता, मन धरि धीर कही मृदु बाता ।।

भावार्थ:– सिंह के से कंधे हैं, विशाल वक्ष:स्थल (चौड़ी छाती) अत्यन्त शोभा दे रहा है । असंख्य कामदेवों के मन को मोहित करने वाला मुख है । भगवान के स्वरूप को देख कर विभीषण जी के नेत्रों में (प्रेमाश्रुओं का) जल भर आया और शरीर अत्यंन्त पुलकित हो गया । फिर मन में धीरज धर कर उन्होंने कोमल वचन कहे……..!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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