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श्रेष्ठ सोचें-श्रेष्ठ पायें

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श्रेष्ठ सोचें-श्रेष्ठ पायें

ऊँची आवाज नहीं अपितु ऊँची सोच ही व्यक्ति को महान बनाती है। विचारों की संकीर्णता जीवन की श्रेष्ठता के पथ में बाधक का कार्य करती हैं।

बिना ऊँची सोच के ऊँचे लक्ष्य की प्राप्ति संभव नहीं है क्योंकि हमारी सोच ही हमारे लक्ष्य का निर्धारण करती है। इसलिए श्रेष्ठ लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विचारों की संकीर्णता का त्याग करते हुए हमारी सोच भी श्रेष्ठ होनी चाहिए।

संकीर्ण विचार गेहूँ के दानों में लगे उस घुन के समान हैं, जो बाहर से सामान्य दिखने के बावजूद भी किसी व्यक्ति क अंदर ही अंदर खोखला कर देते हैं। ऊँची आवाज रखने से आप लोगों की नजरों में तो आ सकते हैं पर लोगों के दिलों में नहीं।

ऊँची सोच ही व्यक्ति को महा बनाती है, ऊँची सोच ही व्यक्ति को जीवन में श्रेष्ठ लक्ष्य की प्राप्ति कराती है और ऊँची सोच से ही व्यक्ति किसी के दिल में जगह बना पाता है। पैर की मोच और छोटी सोच व्यक्ति को कभी भी आगे नहीं बढ़ने देती है।

जय श्री राम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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