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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-167

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुन सीता दुख प्रभु सुख अयना,भरि आए जल राजिव नयना, बचन काय मन मम गति जाही,सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही ।। भावार्थ:- सीता जी का दु:ख सुन कर सुख के धाम प्रभु के कमल नेत्रों...

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संघर्ष जरूरी है

संघर्ष जरूरी है नीति शास्त्र कहते हैं कि अधम श्रेणी के मनुष्य- कठिनाइयों के भय से किसी उत्तम कार्य को...

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अनमोल सुख

अनमोल सुख हम सुख के पीछे भाग रहे है पर सुख और कहीं नहीं हमारे अंदर ही छुपा है एक...

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