सुविचार-सुन्दरकाण्ड-167
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुन सीता दुख प्रभु सुख अयना,भरि आए जल राजिव नयना, बचन काय मन मम गति जाही,सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही ।। भावार्थ:- सीता जी का दु:ख सुन कर सुख के धाम प्रभु के कमल नेत्रों...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुन सीता दुख प्रभु सुख अयना,भरि आए जल राजिव नयना, बचन काय मन मम गति जाही,सपनेहुँ बूझिअ बिपति कि ताही ।। भावार्थ:- सीता जी का दु:ख सुन कर सुख के धाम प्रभु के कमल नेत्रों...
सुखी जीवन का रहस्य पुराने समय में एक राजा था। राजा के पास सभी सुख-सुविधाएं और असंख्य सेवक-सेविकाएं हर समय...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सीता कै अति बिपति बिसाला, बिनहिं कहें भलि दीनदयाला ।। भावार्थ:- सीता जी की विपत्ति...
आचरण और व्यवहार हमारा सबसे बड़ा परिचय है शेर की गर्जना सदियों पहले जैसी बनी हुई है। भैंसा आज भी...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "बिरह अगिनि तनु तूल समीरा, स्वास जरइ छन माहिं सरीरा, नयन स्त्रवहिं जलु निज हित...
मदद और दया सबसे बड़ा धर्म कहा जाता है दूसरों की मदद करना ही सबसे बड़ा धर्म है। मदद एक...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अवगुन एक मोर मैं माना, बिछुरत प्रान न कीन्ह पयाना, नाथ सो नयनन्हि को अपराधा,...
संघर्ष जरूरी है नीति शास्त्र कहते हैं कि अधम श्रेणी के मनुष्य- कठिनाइयों के भय से किसी उत्तम कार्य को...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अनुज समेत गहेहु प्रभु चरना, दीन बन्धु प्रनतारति हरना, मन क्रम बचन चरन अनुरागी, केहिं...