सुविचार-सुन्दरकाण्ड-248
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तब लगि हृदयँ बसत खल नाना, लोभ मोह मच्छर मद माना, जब लगि उर न बसत रघुनाथा, धरें चाप सायक कटि भाथा ।। भावार्थ:- लोभ, मोह, मत्सर (डाह), मद और मान आदि अनेकों दुष्ट तभी...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तब लगि हृदयँ बसत खल नाना, लोभ मोह मच्छर मद माना, जब लगि उर न बसत रघुनाथा, धरें चाप सायक कटि भाथा ।। भावार्थ:- लोभ, मोह, मत्सर (डाह), मद और मान आदि अनेकों दुष्ट तभी...
मम्मी पापा की गलतियों का खामियाजा बच्चे भरते है सुबह के साढ़े सात बजे जब निधि स्कूल के लिए तैयार...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम, जब लगि भजत न राम कहुँ...
वृन्दावन के चींटें एक सच्ची घटना सुनिए एक संत की….वे एक बार वृन्दावन गए वहाँ कुछ दिन घूमे फिरे दर्शन...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "बरु भल बास नरक कर ताता, दुष्ट संग जनि देइ बिधाता, अब पद देखि कुसल...
दो वादे..... ट्रेन अपनी गति से उसके गाँव की ओर बढ़ी चली जा रही थी। रंजना पूरे तेरह साल बाद ...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "*खल मंडली बसहु दिन राती, सखा धरम निबहइ केहि भाँती, मै जानउँ तुम्हारि सब रीती,...
सुकून : कहानी: जो दिल को छू जाए पापा ने कुर्सी से उठने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "अनुज सहित मिलि ढिग बैठारी, बोले बचन भगत भयहारी, कहु लंकेस सहित परिवारा, कुसल कुठाहर...
जैसी करनी वैसा फल, आज नहीं तो मिलेगा कल ! एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुत वर्षों से बीमार...