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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-171

जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनि प्रभु बचन बिलोकि मुख गात हरषि हनुमंत, चरन परेउ प्रेमाकुल त्राहि त्राहि भगवंत ।। भावार्थ:- प्रभु के वचन सुनकर और उनके (प्रसन्न) मुख तथा (पुलकित) अंगों को देख कर हनुमान जी हर्षित हो गये...

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खुशबू की कीमत

खुशबू की कीमत सालों पहले एक भिखारी नंदा नगरी में भूख से तड़पने के कारण खाने के लिए कुछ मांग...

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ताई

ताई मैंने ताई के घर की तरफ देखा। ताई नहीं थी। मैंने चैन की सांस ली। जब कभी मुझे बाहर...

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