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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-166

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जय श्री राधे कृष्ण …….

“सीता कै अति बिपति बिसाला, बिनहिं कहें भलि दीनदयाला ।।

भावार्थ:- सीता जी की विपत्ति बहुत बड़ी है । हे दीनदयालु! वह बिना कही ही अच्छी है (कहने से आपको बडा़ क्लेश होगा) ।।

निमिष निमिष करुणानिधि जाहिं कलप सम बीति ।
बेगि चलिअ प्रभु आनिअ भुज बल खल दल जीति!!

भावार्थ:- हे करुणानिधान ! उनका एक एक पल कल्प के समान बीतता है । अत: हे प्रभु! तुरंत चलिए और अपनी भुजाओं के बल से दुष्टों के दल को जीत कर सीता जी को ले आइये……!!

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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