आधा छप्पर, पूरा आकाश
आधा छप्पर, पूरा आकाश एक घने जंगल के किनारे दो साधु रहते थे। उनमें से एक वृद्ध था, जिसका नाम स्वामी शांतानंद था, और दूसरा उसका युवा शिष्य अर्जुन। दोनों वर्ष भर गांव-गांव घूमकर लोगों को प्रेम, सेवा और ईश्वर...
आधा छप्पर, पूरा आकाश एक घने जंगल के किनारे दो साधु रहते थे। उनमें से एक वृद्ध था, जिसका नाम स्वामी शांतानंद था, और दूसरा उसका युवा शिष्य अर्जुन। दोनों वर्ष भर गांव-गांव घूमकर लोगों को प्रेम, सेवा और ईश्वर...
प्रेम का अदृश्य सहारा एक छोटे से शहर में एक वृद्ध दंपति रहते थे। पति का नाम मोहनलाल था और उनकी उम्र लगभग अस्सी वर्ष थी। उनकी पत्नी सरला देवी उनसे कुछ वर्ष छोटी थीं। दोनों का जीवन सादगी, प्रेम...
महाराज रघु का दान महाराज रघु अयोध्या के सम्राट् थे। वे भगवान् श्रीराम के प्रपितामह (परदादा) थे। उनके नाम से ही उनके वंश के क्षत्रिय रघुवंशी कहे जाते हैं। एक बार महाराज रघु ने एक बड़ा भारी यज्ञ किया। जब...
शिव परिवार की गाथा शिव पुराण की कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती के साथ द्युत (चौसर) खेलने की अभिलाषा प्रकट की! खेल में भगवान शंकर अपना सब कुछ हार गए, हारने के बाद भोलेनाथ अपनी...
भविष्य की चिंता में वर्तमान को खो देना सबसे बड़ी मूर्खता है एक छोटे से गाँव में विवेक नाम का एक युवक रहता था। वह पढ़ा-लिखा और मेहनती था, लेकिन उसकी एक आदत उसे हमेशा परेशान रखती थी—वह हर समय...
पिता का आशीर्वाद रामदास रोज़ सुबह अपनी बेटी सीता को स्कूल छोड़ने जाता था। सीता छोटी थी, पर उसके सपने बड़े थे। वह अपने पापा से कहती, “मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनूँगी और सब गरीबों का इलाज करूँगी।” रामदास गरीब...
कल की चिंता एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था।राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए...
मन की सोच एक बच्चा अपने पापा के साथ पिकनिक मनाने गया। गर्मियों की छुट्टियां थीं तो सोचा क्यों ना कुछ समय प्रकृति के नजदीक शांति में गुजारा जाये। यही सोचकर उन्होंने कहीं पहाड़ों पे घूमने का प्लान बनाया। सामान...
भक्त और भगवान एक बार भगवती पार्वती ने भगवान् शंकर से कहा... ’देव ! आज किसी भक्त श्रेष्ठ का दर्शन कराने की कृपा करें।’ भगवान् शंकर तत्काल उठ खड़े हुए और कहा–’जीवन के वही क्षण सार्थक हैं जो भगवान् के...
कर्म का फल एक बार की कथा है, देवऋषि नारद और ऋषि अंगिरा कहीं जा रहे थे। रास्ते में उनकी नजर एक मिठाई की दुकान पर पड़ी। दुकान के नजदीक ही झूठी पतलों का ढेर लगा हुआ था। उस झूठन...