नेकी का हिसाब सच में चुकता होता है
नेकी का हिसाब सच में चुकता होता है मुंबई—सपनों का शहर। एक ऐसा शहर जहाँ लाखों लोग अपनी आँखों में हज़ारों उम्मीदें लिए हर रोज़ ट्रेन और बसों की भीड़ में अपनी किस्मत आज़माते हैं। यहाँ की रफ़्तार कभी नहीं...
नेकी का हिसाब सच में चुकता होता है मुंबई—सपनों का शहर। एक ऐसा शहर जहाँ लाखों लोग अपनी आँखों में हज़ारों उम्मीदें लिए हर रोज़ ट्रेन और बसों की भीड़ में अपनी किस्मत आज़माते हैं। यहाँ की रफ़्तार कभी नहीं...
तुम एक व्यापारी हो और मैं भी एक भिखारी किसी स्टेशन पर पेंसिलों से भरा कटोरा लेकर बैठा हुआ था। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसने कटोरे में 50 रूपये डाल दिया, लेकिन उसने कोई पेंसिल नहीं ली।...
दर्शन और देखने में अंतर एक दिन मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा – “ चल मंदिर चलते है ?” मैंने कहा – “ किसलिए ?” मित्र बोला – “ दर्शन के लिए !” मैं बोला – “ क्यों !...
यदि तुम बहादुर होते तो मुस्लमान बनते ही क्यों चौधरी चरण सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे उस समय उत्तर प्रदेश के विधानसभा में दो मुसलमान थे...!! एक दिन विधानसभा भवन में एक कमाल यूसुफ नाम के विधायक...
अहंकार करना उचित नही प्राचीन काल की बात है, शेषनाग का एक महा बलवान् पुत्र था। उसका नाम मणिनाग था। उसने भक्ति भाव से भगवान् शंकर की उपासना कर गरुड़ से अभय होने का वरदान माँगा। भगवान् शंकर ने कहा-...
पछतावा THE TOP FIVE REGRETS of the DYING आस्ट्रेलिया की ब्रोनी वेयर कई वर्षों तक कोई सार्थक काम तलाशती रहीं, लेकिन कोई शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव न होने के कारण बात नहीं बनी। फिर उन्होंने एक हॉस्पिटल की Palliative Care...
भगवान का काम एक बार एक राजा ने अपने दरबारी मंत्रियों से पूछा, प्रजा के सारे काम मैं करता हूँ, उनको अन्न मैं देता हूँ रोजगार मैं देता हूँ उनकी बेटियों के विवाह मैं कराता हूं सुरक्षा मैं देता हूँ...
नाम जपने वाले की रक्षा एक संत हुए श्री अनंतकृष्ण बाबा जी। उनके पास एक लड़का सत्संग के लिए आया करता था। प्रभावित होकर दीक्षा के लिए प्रार्थना करने पर बाबा ने कहा कि महामंत्र का 11 लाख जप करके...
मनदर्पण-मन का दर्पण एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा से बहुत प्रभावित हुए । विद्या पूरी होने के बाद जब शिष्य विदा होने लगा तो गुरू ने उसे आशीर्वाद के रूप में एक दर्पण दिया । वह साधारण...
अर्जुन ने जयद्रथ के वध की प्रतिज्ञा क्यों की जयद्रथ ने अभिमन्यु को एक खरोंच भी नहीं लगाई थी फिर भी अर्जुन ने उसको मारने की प्रतिज्ञा क्यों ली?.... ये बहुत ही रोमांचक प्रसंग आज की कहानी में पढ़िए...एक जीवन...