भिखारी और महाकाल
भिखारी और महाकाल उज्जैन, अवंतिका नगरी। जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक "महाकालेश्वर" विराजते हैं। कहते हैं उज्जैन में काल भी महाकाल के अधीन है। साल 1897। पूरा मालवा अकाल से जूझ रहा था। 2 साल से बारिश नहीं। शिप्रा...
भिखारी और महाकाल उज्जैन, अवंतिका नगरी। जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक "महाकालेश्वर" विराजते हैं। कहते हैं उज्जैन में काल भी महाकाल के अधीन है। साल 1897। पूरा मालवा अकाल से जूझ रहा था। 2 साल से बारिश नहीं। शिप्रा...
खुशहाल और शांति पूर्ण परिवार दो परिवार एक दूसरे के पड़ोस में ही रहते थे। एक परिवार हर वक्त लड़ता था जबकि दूसरा परिवार शांति से और मैत्रीपूर्ण रहता था। एक दिन, झगड़ालू परिवार की पत्नी ने शांत पडोसी परिवार...
स्वतंत्रता दिवस रोहित और नीरज पापा से पैसे लेकर बाज़ार की तरफ जा रहे थे, क्योंकि उन्हें इस स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के अवसर पर देश का तिरंगा झंडे खरीदने थे। इस 15 अगस्त के दिन हमारा घर सबसे अच्छा...
ये दिल मांगे मोर कारगिल युद्ध के दौरान विक्रम बत्रा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। पॉइंट 5140 पर कब्जे के दौरान उनके नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता दिखाई। इसी दौरान उनका प्रसिद्ध संदेश था—“ये दिल मांगे मोर!”...
समय और भाग्य चमनलाल सारा दिन धूप में इधर-उधर घूम-फिर कर टूटा-फूटा सामान और कबाड़ जमा करता, फिर शाम को उसे बड़े कबाड़ी की दुकान पर बेचकर पेट भरने लायक कमा लेता था। एक दिन वह एक घर से पुराना...
अपने आप को छोड़ो एक राजा था। उसने परमात्मा को खोजना चाहा। वह किसी आश्रम में गया। उस आश्रम के प्रधान साधु ने कहा, जो कुछ तुम्हारे पास है, उसे छोड़ दो। परमात्मा को पाना तो बहुत सरल है। ...
इच्छापूर्ति एक घने जंगल में एक इच्छा पूर्ति वृक्ष था, उसके नीचे बैठ कर कोई भी इच्छा करने से वह तुरंत पूरी हो जाती थी। यह बात बहुत कम लोग जानते थे क्योंकि उस घने जंगल में जाने की कोई...
वह राम है... रावण राम का शत्रु था, लेकिन कभी-कभी शत्रु भी ऐसी बात कह जाता है, जो जीवन भर के लिए सीख बन जाती है। कहा जाता है कि एक बार रावण ने हनुमान से कहा—“उस पूरी वानर सेना...
बड़ो-की-बात-मानो एक बहुत घना जंगल था, उसमें पहाड़ थे और शीतल निर्मल जल के झरने बहते थे। जंगल में बहुत- से पशु रहते थे। पर्वत की गुफा में एक शेर-शेरनी और इन के दो छोटे बच्चे रहते थे। शेर और...
विश्वास की असली ताकत एक छोटे से गाँव में मोहित नाम का आठवीं कक्षा का छात्र रहता था। वह पढ़ाई में ठीक था, लेकिन हर छोटी-बड़ी बात पर डर जाता था। परीक्षा आते ही कहता, "मैं पास नहीं हो पाऊँगा।"...