महात्मा और धोबी
महात्मा और धोबी एक नदी तट पर स्थित बड़ी सी शिला पर एक महात्मा बैठे हुए थे। वहाँ एक धोबी आता है किनारे पर वही मात्र शिला थी जहां वह रोज कपड़े धोता था। उसने शिला पर महात्मा जी को...
महात्मा और धोबी एक नदी तट पर स्थित बड़ी सी शिला पर एक महात्मा बैठे हुए थे। वहाँ एक धोबी आता है किनारे पर वही मात्र शिला थी जहां वह रोज कपड़े धोता था। उसने शिला पर महात्मा जी को...
श्री अमरनाथ यात्रा — आस्था, तप, विश्वास और सनातन संस्कृति का दिव्य संगम श्री अमरनाथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र, दिव्य और श्रद्धा से परिपूर्ण शिव यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि...
सच्ची मानवता भाई .... मैंने तुम्हें कल सुबह जो थैलियां दी थी वो... हां हां बाबा ....सिलाई कर दी मैंने जैसे आपने कहा था, रुकिए देता हूं कहकर मोहन दर्जी जो सड़क किनारे एक खाली जगह पर छायादार वृक्ष के...
परिवार और दोस्त जंगली भैसों का एक झुण्ड जंगल में घूम रहा था।तभी एक छोटे भैसे ने पुछा… पिता जी, क्या इस जंगल में ऐ सी कोई चीज है जिससे डरने की ज़रुरत है ? बस शेरों से सावधान रहना.....
सास की एक शर्त "बहू… इस घर की चाबी तुम्हें तभी दूँगी, जब तुम मेरी एक शर्त मानोगी।" नई-नवेली दुल्हन काव्या ने चौंककर अपनी सास कमला देवी की ओर देखा। उसने सोचा, "शायद मांजी घर के नियम बताएँगी… सुबह चार...
नन्ही माँ का बड़ा सपना शहर की एक छोटी-सी चाय की दुकान पर रोज़ की तरह ग्राहकों की भीड़ लगी हुई थी। दुकान के कोने में एक आठ-दस साल की दुबली-पतली बच्ची फुर्ती से काम कर रही थी। उसके एक...
आधा छप्पर, पूरा आकाश एक घने जंगल के किनारे दो साधु रहते थे। उनमें से एक वृद्ध था, जिसका नाम स्वामी शांतानंद था, और दूसरा उसका युवा शिष्य अर्जुन। दोनों वर्ष भर गांव-गांव घूमकर लोगों को प्रेम, सेवा और ईश्वर...
प्रेम का अदृश्य सहारा एक छोटे से शहर में एक वृद्ध दंपति रहते थे। पति का नाम मोहनलाल था और उनकी उम्र लगभग अस्सी वर्ष थी। उनकी पत्नी सरला देवी उनसे कुछ वर्ष छोटी थीं। दोनों का जीवन सादगी, प्रेम...
महाराज रघु का दान महाराज रघु अयोध्या के सम्राट् थे। वे भगवान् श्रीराम के प्रपितामह (परदादा) थे। उनके नाम से ही उनके वंश के क्षत्रिय रघुवंशी कहे जाते हैं। एक बार महाराज रघु ने एक बड़ा भारी यज्ञ किया। जब...
शिव परिवार की गाथा शिव पुराण की कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती के साथ द्युत (चौसर) खेलने की अभिलाषा प्रकट की! खेल में भगवान शंकर अपना सब कुछ हार गए, हारने के बाद भोलेनाथ अपनी...