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अनुभव और सीख

अनुभव और सीख बाजार क्षेत्र में मैं अपनी बाइक से सही साइड में चल रहा था। मेरे देवी जी और उनकी एक साथी भी थीं। सामने से दो युवक रॉन्ग साइड से बाइक लेकर आ रहे थे। उनकी बाइक के...

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कर्मों का फल

कर्मों का फल एक समय की बात है गुरु और शिष्य किसी गांव से गुजर रहे थे थोड़ी दूर चलने पर गुरू जी ने शिष्य से एक कपड़े का टुकड़ा मांगा..!! आज्ञाकारी शिष्य ने बिना कोई विचार किए अपनी धोती...

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प्रकृति की नियति

प्रकृति की नियति दो लड़के बाग में खेल रहे थे, तभी उन्होंने एक पेड़ पर जामुन लगे देखें। उनके मुंह में पानी भर आया। वे जामुन खाना चाहते थे लेकिन पेड़ बहुत ऊंचा था। अब कैसे खाएं जामुन ? समस्या...

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जिंदगी की नाव

जिन्दगी की नाव एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया अपने घर, और अपनी नाव दिखाकर कहा कि इसको पेंट कर दो ! उस पेंटर ने पेंट लेकर उस नाव को लाल रंग से पेंट कर दिया जैसा कि नाव...

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श्रवण कुमार -जीत की कुर्बानी

श्रवण कुमार -जीत की कुर्बानी शाम की चाय की चुस्की लेते हुए दीनानाथ जी ने अखबार नीचे रखा और सामने बैठे अपने बेटे, राघव, की तरफ एक नज़र डाली "अरे राघव, सुना है शर्मा जी का बेटा अमेरिका से वापस...

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राजपूत और शराब

राजपूत और शराबमुगल बादशाह का दिल्ली में दरबार लगा था और हिंदुस्तान के दूर दूर के राजा महाराजा दरबार में हाजिर थे। उसी दौरान मुगल बादशाह ने एक(मजाक) दम्भोक्ति की है कोई हमसे बहादुर इस दुनिया में है? सभा में...

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कठिन समय

कठिन समय कठिन समय में आप क्या बनते हैं, यह आप पर निर्भर करता है। एक बार कि बात है, एक कक्षा में गुरूजी अपने सभी छात्रों को समझाना चाहते थे कि प्रकर्ति सभी को समान अवसर देती हैं और...

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केकड़ों की सीख

केकड़ों की सीख एक समय की बात है, भारत से कुछ केकड़े (crabs) जापान भेजे गए। उन्हें समुद्र के रास्ते एक खुले कंटेनर में रखा गया था। जब जहाज़ जापान पहुँचा, तो वहाँ के लोगों ने केकड़ों की गिनती की।...

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कर्मों की गूँज: एक निस्वार्थ भेंट

कर्मों की गूँज: एक निस्वार्थ भेंट दिल्ली के एक बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल में एक दिन एक अत्यंत गंभीर मरीज को लाया गया। उसकी हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में भर्ती करना पड़ा। जब...

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अपनों की गद्दारी

अपनों की गद्दारी गाँव के बाहर एक घना जंगल था। वही जंगल गाँव की पहचान था—बरसात में हरियाली, गर्मियों में ठंडी छाँव और सर्दियों में लकड़ियों की ऊष्मा। उसी जंगल के किनारे रहता था रघु, सीधा-सादा, मेहनती और सब पर...

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