आस्था की अग्नि
“आस्था की अग्नि” विंध्याचल पर्वत की तलहटी में बसा “श्रीवन” गाँव कभी हरियाली से भरा था। खेतों में सुनहरी फसलें लहराती थीं, पर अब वहाँ सूखा पड़ गया था। जलस्रोत सूख चुके थे, और गाँव के लोग निराश हो चुके...
“आस्था की अग्नि” विंध्याचल पर्वत की तलहटी में बसा “श्रीवन” गाँव कभी हरियाली से भरा था। खेतों में सुनहरी फसलें लहराती थीं, पर अब वहाँ सूखा पड़ गया था। जलस्रोत सूख चुके थे, और गाँव के लोग निराश हो चुके...
कृष्ण सदा सहायते वृंदावन में एक बार एक ग्वाला कृष्ण के प्रति बहुत प्रेम रखता था। उसका नाम माधव था। माधव बहुत साधारण व्यक्ति था, पर उसका हृदय श्रीकृष्ण के लिए अपार भक्ति से भरा हुआ था। माधव रोज़ सुबह...
खीर की प्रसादी बरसाना में श्री रूप गोस्वामी चैतन्य महाप्रभु के छः शिष्यों में से एक थे। एक बार भ्रमण करते-करते अपने चेले जीव गोस्वामी जी के यहाँ बरसाना आए।जीव गोस्वामी जी ठहरे फक्कड़ साधू। फक्कड़ साधू को जो मिल...
कर्म फल भोगना पड़ता है एक बार लक्ष्मी और नारायण धरा (पृथ्वी) पर घूमने आए, कुछ समय घूम कर वो विश्राम के लिए एक बगीचे में जाकर बैठ गए। नारायण आंख बंद कर लेट गए, लक्ष्मी जी बैठ कर नज़ारे...
निर्मल हृदय की दीपावली कार्तिक अमावस्या की रात थी। आकाश में न तारा चमक रहा था, न चाँद की किरणें थीं—चारों ओर केवल गहरा, अंधकार फैला हुआ था। सारे जीव जैसे किसी मौन पूजा में लीन थे। ऐसी शुभ रात्रि...
अमावस्या की रात और अलक्ष्मी का साया जयपुर की 'शांति निवास' हवेली, नाम के विपरीत, भीतर से अशांत थी। बाहर जहाँ बाज़ार में दीवाली की चहल-पहल थी, वहीं हवेली के विशाल चौक में अर्जुन के परिवार के बीच तनाव का...
धनतेरस की कथा – भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, एक बार देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति की होड़ मची। अमृत पाने के लिए भगवान विष्णु के सुझाव पर देवता और असुर मिलकर...
जिसके सपने बड़े हों वो छोटी – मोटी बहस में नहीं पड़ते एक करोड़पति ने अपने बड़े से घर की रक्षा के लिए एक कुत्ता पाला। उसके घर के दरवाजे दो तरफ से खुलते थे - आगे से भी और...
सेवाभावी-की-कसौटी स्वामीजी का प्रवचन समाप्त हुआ। अपने प्रवचन में उन्होंने सेवा-धर्म की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला और अन्त में यह निवेदन भी किया कि जो इस मार्ग पर चलने के इच्छुक हों, वह मेरे कार्य में सहयोगी हो...
आत्मा का कल्याणएक बनिया था, उसका व्यापार काफी जोरों से चल रहा था! किन्तु उसके दिल में साधू-संतो के प्रति प्यार की भावना थी! अतः आये गए अथितियों की सेवा भी करता था!एक बार एक साधू उसके घर पर आकर...