हनुमान जी किसके सेवक
हनुमान जी किसके सेवक एक दिन की बात है कि श्रीरामचंद्र जी और सीताजी बैठे हुए थे। आपस में बाते हो रही थीं। हनुमानजी की चर्चा छिड़ी तो श्रीरामजी ने कहा:"हनुमान मेरा बड़ा भक्त है।"सीताजी बोली: अरे वाह ! आपने...
हनुमान जी किसके सेवक एक दिन की बात है कि श्रीरामचंद्र जी और सीताजी बैठे हुए थे। आपस में बाते हो रही थीं। हनुमानजी की चर्चा छिड़ी तो श्रीरामजी ने कहा:"हनुमान मेरा बड़ा भक्त है।"सीताजी बोली: अरे वाह ! आपने...
समय नहीं है बारह घंटे का सफ़र चार घंटे में सिमट गया, फिर भी समय नहीं है । बारह लोगों का परिवार दो लोगों में सिमट गया, फिर भी समय नहीं है । जो संदेश चार हफ़्ते में मिलता था,...
नदी का घमंड एक बार नदी ने समुद्र से बड़े ही गर्वीले शब्दों में कहा बताओ पानी के प्रचंड वेग से मैं तुम्हारे लिए क्या बहा कर लाऊं ? तुम चाहो तो मैं पहाड़, मकान, पेड़, पशु, मानव आदि सभी...
इच्छाशक्ति या प्रभुकृपा पर विश्वासप्रभु की कृपा पर विश्वास करने के उपरान्त यदि हम इच्छाशक्ति का प्रयोग करें तब तो फिर कहना ही क्या है । फिर तो स्वयं विशुध्द होकर विशुध्द लक्ष्य की ओर जाने वाली हो जायगी और...
उद्धव - कृष्ण संवाद उद्धव ने कृष्ण से पूछा, जब द्रौपदी लगभग अपना शील खो रही थी, तब आपने उसे वस्त्र देकर द्रौपदी के शील को बचाने का दावा किया! लेकिन आप यह दावा भी कैसे कर सकते हैं ?....उसे...
ईश्वर को धन्यवाद मेरे पिताजी की आदत भी अज़ीब थी। खाना खाने बैठते तो एक निवाला तोड़ कर थाली के चारों ओर घूमाते और फिर उसे किनारे रख कर थाली को प्रणाम करते और खाना खाना शुरू करते। मैं उन्हें...
भगवान जगन्नाथ ज्येष्ठ पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ 15 दिनों के लिए बीमार होकर एकांतवास में चले जाते हैं। इसे अनासरा या ज्वर लीला कहा जाता है। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहते हैं और केवल दायित्वगण ही भगवान...
व्यक्ति का सही मूल्यांकन एक धनी व्यक्ति का बटुआ बाजार में गिर गया। उसे घर पहुंच कर इस बात का पता चला। बटुए में जरूरी कागजों के अलावा कई हजार रुपये भी थे। फौरन ही वो मंदिर गया और प्रार्थना...
जीवन अनिश्चिताओं का खेल है कोई दो बार टिकट कैंसिल करवाकर फिर टिकट बनाकर रवाना होता है और फिर कभी वापस नहीं आता है तो कोई अच्छी नौकरी की तलाश में पहले की नौकरी छोड़ कर जाता है फिर कभी...
“मन की दुकान” शहर के बीचोंबीच एक छोटी सी दुकान थी – “मन की दुकान”। यहाँ हर दिन तरह-तरह के लोग आते-जाते रहते थे। इस दुकान का मालिक था – अर्जुन। अर्जुन ने एक बोर्ड लगाया था – “यहाँ आत्मा...