सुविचार-सुन्दरकाण्ड-205
जय श्री राधे कृष्ण ……. " काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ, सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत ।। भावार्थ:- हे नाथ! काम, क्रोध, मद और लोभ - ये सब नरक के रास्ते हैं । इन...
जय श्री राधे कृष्ण ……. " काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ, सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत ।। भावार्थ:- हे नाथ! काम, क्रोध, मद और लोभ - ये सब नरक के रास्ते हैं । इन...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "चौदह भुवन एक पति होई, भूत द्रोह तिष्टइ नहिं सोई, गुन सागर नागर नर जोऊ, अलप लोभ भल कहइ न कोऊ ।। भावार्थ:- चौदहों भुवनों का एक ही स्वामी हो, वह भी जीवों से वैर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जो आपन चाहै कल्याना, सुजसु सुमति सुभ गति सुख नाना, सो परनारि लिलार गोसाईं, तजउ चउथि के चंद कि नाईंं ।। भावार्थ:- जो मनुष्य अपना कल्याण, सुन्दर यश, सुबुद्धि, शुभ गति और नाना प्रकार के...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "पुनि सिरु नाइ बैठ निज आसन, बोला बच पाइ अनुसासन, जौ कृपाल पूँछिहु मोहि बाता, मति अनुरूप कहउँ हित ताता ।। भावार्थ:- फिर वे सिर नवा कर अपने आसन पर बैठ गये और आज्ञा पाकर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सोइ रावन कहुँ बनी सहाई, अस्तुति करहिं सुनाई सुनाई, अवसर जानि बिभीषनु आवा, भ्राता चरन सीसु तेहिं नावा ।। भावार्थ:- रावण के लिए भी वही सहायता (संयोग) आ बनी है । मन्त्री उसे सुना-सुना कर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जितेहु सुरासुर तब श्रम नाहीं, नर बानर केहि लेखे माहीं ।। भावार्थ:- आप ने देवताओं और राक्षसों को जीत लिया तब तो कुछ श्रम ही नहीं हुआ, फिर मनुष्य और वानर किस गिनती में हैं...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "बैठेउ सभा खबरि असि पाई, सिंधु पार सेना सब आई, बूझेसि सचिव उचित मत कहहू, ते सब हँसे मष्ट करि रहहू ।। भावार्थ:- ज्यों ही वह सभा में जा कर बैठा, उस ने ऐसी खबर...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "अस कहि बिहसि ताहि उर लाई, चलेउ सभा ममता अधिकाई, मंदोदरी हृदयँ कर चिंता, भयउ क़ंत पर बिधि बिपरीता ।। भावार्थ:- रावण ने ऐसा कह कर हँस कर उसे हृदय से लगा लिया और ममता...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जौं आवइ मर्कट कटकाई, जिअहिं बिचारे निसिचर खाई, कंपहिं लोकप जाकीं त्रासा, तासु नारि सभीत बड़ि हासा ।। भावार्थ:- यदि वानरों की सेना आवेगी तो बेचारे राक्षस उसे खा कर अपना जीवन निर्वाह करेंगे ।...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "श्रवन सुनी सठ ता करि बानी, बिहसा जगत बिदित अभिमानी, सभय सुभाउ नारि कर साचा, मंगल महुँ भय मन अति काचा ।। भावार्थ:- मूर्ख और जगत प्रसिद्ध अभिमानी रावण कानों से उसकी वाणी सुन कर...