जय श्री राधे कृष्ण …….
“अस कहि बिहसि ताहि उर लाई, चलेउ सभा ममता अधिकाई, मंदोदरी हृदयँ कर चिंता, भयउ क़ंत पर बिधि बिपरीता ।।
भावार्थ:- रावण ने ऐसा कह कर हँस कर उसे हृदय से लगा लिया और ममता बढ़ा कर (अधिक स्नेह दर्शा कर) वह सभा में चला गया । मंदोदरी हृदय में चिन्ता करने लगी कि पति पर विधाता प्रतिकूल हो गए….!!
सुप्रभात
आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..
