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जिम्मेदारी का भार

जिम्मेदारी का भार पंडित बलराम से उनकी पत्नी माया काफी समय से एक हार की मांग कर रही थी। हर बार पंडित उनकी बातों को टाल देते थे। वो कभी अपनी पत्नी से यह नहीं कह पाते थे कि उनके...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-208

जय श्री राधे कृष्ण ……. "ताहि बयरु तजि नाइअ माथा, प्रनतारति भंजन रघुनाथा, देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही, भजहु राम बिनु हेतु सनेही ।। भावार्थ:- वैर त्याग कर उन्हें मस्तक नवाइए । वे श्री रघुनाथ जी शरणागत का दु:ख नाश...

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मन का अहंकार

“मन का अहंकार”बूढी मां और लाचार बाप को बिलखता छोड़कर एक ऋषि तपस्या करने के लिए वन में चले गए ! तप करने के बाद जब ऋषि उठे तो देखा कि एक कौवा अपनी चोंच में एक चिड़िया का बच्चा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-207

जय श्री राधे कृष्ण ……. " गो द्विज धेनु देव हितकारी, कृपा सिंधु मानुष तनुधारी, जन रंजन भंजन खल ब्राता, बेद धर्म रच्छक सुनु भ्राता ।। भावार्थ :- उन कृपा के समुद्र भगवान ने पृथ्वी, ब्राह्मण, गौ और देवताओं का...

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सवाल इज्ज़त का है

सवाल इज्ज़त का है एक बार एक पहलवान रात को कहीं जा रहा था कि अंधेरे का फ़ायदा उठाकर चार चोरों ने उसपर हमला कर दिया। लेकिन पहलवान उनसे इस तरह भिड़ गया जैसे कोई बहादुर इंसान लड़ सकता था...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-206

जय श्री राधे कृष्ण ……. " तात राम नहिं नर भूपाला, भुवनेस्वर कालहु कर काला, ब्रह्म अनामय अज भगवंता, ब्यापक अजित अनादि अनंता ।। भावार्थ:- हे तात! राम मनुष्यों के ही राजा नहीं हैं, वे समस्त लोकों के स्वामी और...

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इंसानियत की प्रतिस्पर्धा

इंसानियत की प्रतिस्पर्धा चार महीने बीत चुके थे, बल्कि 10 दिन ऊपर हो गए थे, किंतु बड़े भइया की ओर से अभी तक कोई ख़बर नहीं आई थी कि वह पापा को लेने कब आएंगे. यह कोई पहली बार नहीं...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-205

जय श्री राधे कृष्ण ……. " काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ, सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत ।। भावार्थ:- हे नाथ! काम, क्रोध, मद और लोभ - ये सब नरक के रास्ते हैं । इन...

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छबील क्यूं लगाई जाती है

छबील क्यूं लगाई जाती है श्री गुरु अर्जुनदेव जी को जिस दिन गर्म तवी पर बिठाया गया, उसी शाम को गुरु जी को वापिस जेल मे डाल दिया गया, और बहुत सख्त पहरा लगा दिया गया कि कोई भी गुरुजी...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-204

जय श्री राधे कृष्ण ……. "चौदह भुवन एक पति होई, भूत द्रोह तिष्टइ नहिं सोई, गुन सागर नागर नर जोऊ, अलप लोभ भल कहइ न कोऊ ।। भावार्थ:- चौदहों भुवनों का एक ही स्वामी हो, वह भी जीवों से वैर...

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