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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-206

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जय श्री राधे कृष्ण …….

” तात राम नहिं नर भूपाला, भुवनेस्वर कालहु कर काला, ब्रह्म अनामय अज भगवंता, ब्यापक अजित अनादि अनंता ।।

भावार्थ:- हे तात! राम मनुष्यों के ही राजा नहीं हैं, वे समस्त लोकों के स्वामी और काल के भी काल हैं । वे (संपूर्ण) ऐश्वर्य, यश, श्री, धर्म, वैराग्य एवं ज्ञान के भंडार भगवान् हैं । वे निरामय (विकार रहित), अजन्मा, व्यापक, अजेय, अनादि और अनन्त ब्रह्म हैं…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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