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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-208

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जय श्री राधे कृष्ण …….

ताहि बयरु तजि नाइअ माथा, प्रनतारति भंजन रघुनाथा, देहु नाथ प्रभु कहुँ बैदेही, भजहु राम बिनु हेतु सनेही ।।

भावार्थ:– वैर त्याग कर उन्हें मस्तक नवाइए । वे श्री रघुनाथ जी शरणागत का दु:ख नाश करने वाले हैं । हे नाथ! उन प्रभु (सर्वेश्वर) को जानकी जी दे दीजिए और बिना कारण ही स्नेह करने वाले श्री राम जी को भजिए…..!!

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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