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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
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चरण स्पर्श

चरण स्पर्श चरण स्पर्श करने का वैज्ञानिक रहस्य जान जाओगे तो प्रतिदिन अपने बच्चों को यह सीख दोंगे। अपने से बड़ों का अभिवादन करने के लिए चरण छूने की परंपरा सदियों से रही है। भारतीय संस्कृति में अपने से बड़े...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-39

जय श्री राधे कृष्ण ……. तामस तनु कछु साधन नाहीं, प्रीति न पद सरोज मन माहीं, अब मोहि भा भरोस हनुमंता बिनु हरि कृपा मिलहि नहि संता…..!! भावार्थ:- मेरा तामसी (राक्षस) शरीर होने से साधन तो कुछ बनता नहीं, और...

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सकारात्मक” अभ्यास….

सकारात्मक" अभ्यास.... एक महिला और उसका पति एक सर्कस में काम करते थे। महिला स्टेज में एक जगह खड़ी हो जाती थी और पति बिना देखे (आंख पर पट्टी बांधकर) तीर उसकी ओर मारता था जिससे उसके चारो ओर तीरों...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-38

जय श्री राधे कृष्ण ……. सुनहु पवनसुत रहनि हमारी, जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी, तात कबहु मोहि जानि अनाथा, करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा…..!! भावार्थ:- विभीषण जी ने कहा, हे पवनपुत्र, मेरी रहनी सुनो । मैं यहां वैसे ही रहता हूँ,...

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पिता का स्वरुप

पिता का स्वरुप एक बार गणेश जी ने भगवान शिव जी से कहा,पिता जी ! आप यह चिता भस्म लगा कर मुण्डमाला धारण कर अच्छे नहीं लगते, मेरी माता गौरी अपूर्व सुन्दरी औऱ आप उनके साथ इस भयंकर रूप में...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-37

जय श्री राधे कृष्ण ……. तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम, सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम….!! भावार्थ:- तब हनुमान जी ने श्री रामचंद्र जी की सारी कथा कह कर अपना नाम बताया । सुनते...

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विपत्ति में भाइयों का साथ

विपत्ति में भाइयों का साथ जब ये लोग खेलते थे तो लक्ष्मण राम की तरफ उनके पीछे होता था और सामने वाले पाले में भरत और शत्रुघ्न होते थे। तब लक्ष्मण हमेशा भरत को बोलते कि राम भैया सबसे ज्यादा...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-36

जय श्री राधे कृष्ण ……. की तुम्ह हरि दासन्ह मह कोई, मोरें हृदय प्रीति अति होई, की तुम्ह रामु दीन अनुरागी, आयहु मोहि करन बड़भागी…..!! भावार्थ:- क्या आप हरि भक्तों में से कोई हैं ? क्योंकि आप को देख कर...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-35

जय श्री राधे कृष्ण ……. बिप्र रुप धरि बचन सुनाए, सुनत बिभीषन उठि तहं आए, करि प्रनाम पूंछी कुसलाई, बिप्र कहहु निज कथा बुझाई….!! भावार्थ:- ब्राह्मण का रूप धर कर हनुमान जी ने उन्हें वचन सुनाए (पुकारा) । सुनते ही...

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