सुविचार-सुन्दरकाण्ड-299
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह सुक नाथ सत्य सब बानी, समुझहु छाड़ि प्रकृति अभिमानी, सुनहु बचन मम परिहरि क्रोधा, नाथ राम सन तजहु बिरोधा ।। भावार्थ:- शुक (दूत) ने कहा - हे नाथ! अभिमानी स्वभाव को छोड़ कर (इस...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह सुक नाथ सत्य सब बानी, समुझहु छाड़ि प्रकृति अभिमानी, सुनहु बचन मम परिहरि क्रोधा, नाथ राम सन तजहु बिरोधा ।। भावार्थ:- शुक (दूत) ने कहा - हे नाथ! अभिमानी स्वभाव को छोड़ कर (इस...
वाल्मीकि रामायण भाग 13रात बीती और पुष्य नक्षत्र में राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त आ गया। अपने शिष्यों के साथ महर्षि वसिष्ठ राज्याभिषेक की आवश्यक सामग्री लेकर राजा दशरथ के अंतःपुर में पहुंचे। उन्होंने मंत्री सुमन्त्र से कहा, "सूत! तुम शीघ्र...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सुनत सभय मन मुख मुसकाई, कहत दसानन सबहि सुनाई, भूमि परा कर गहत अकासा, लघु तापस कर बाग बिलासा ।। भावार्थ:- पत्रिका सुनते ही रावण मन में भयभीत हो गया, परंतु मुख से (ऊपर से)...
वाल्मीकि रामायण भाग 12 वहाँ पास ही दूसरी छत पर उसने श्रीराम की धाय(धाय अर्थात माता) को देखा। उसका मुख प्रसन्नता से खिला हुआ था। उसने पीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी हुई थी। उसे देखकर मन्थरा ने पूछा, “धाय!...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस, राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस ।। भावार्थ:- (पत्रिका में लिखा था) अरे मूर्ख ! केवल बातों से ही मन को रिझा कर अपने कुल...
वाल्मीकि रामायण भाग 11भरत जी अपने मामा के साथ जाते समय भाई शत्रुघ्न को भी साथ ले गए थे। उनके मामा युधाजित् अश्वयूथ के अधिपति थे। उनके राज्य में दोनों भाइयों का बड़ा आदर सत्कार हुआ और वे वहाँ सुखपूर्वक...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "*रामानुज दीन्हीं यह पाती, नाथ बचाइ जुडा़वहु छाती, बिहसि बाम कर लिन्हीं रावन, सचिव बोलि सठ लाग बचावन ।। भावार्थ:- (और कहा) श्री राम जी के छोटे भाई लक्ष्मण ने यह पत्रिका दी है ।...
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 10 महाराज दशरथ जी के चारों पुत्रों एवं वधुओं के स्वागत् में पूरी अयोध्यापुरी को बहुत सुन्दर सजाया गया था। चारों ओर ध्वज और पताकाएँ फहरा रही थीं। सड़कों पर जल का छिड़काव किया गया...
जय श्री राधे कृष्ण ….. "सचिव सभीत बिभीषन जाकें, बिजय बिभूति कहाँ जग ताकें, सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी, समय बिचारि पत्रिका काढ़ी ।। भावार्थ:- जिसके विभीषण जैसा डरपोक मंत्री हो, उस के लिए संसार में विजय और विभूति...
वाल्मीकि रामायण अयोध्या काण्ड- भाग 9 मिथिला में विवाह की बातचीत तय हो ही रही थी कि भरत के मामा युधाजित भी वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने दशरथ जी को प्रणाम करके कहा, “महाराज! केकयनरेश ने आपका कुशल समाचार पूछा है।...