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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-304

जय श्री राधे कृष्ण ….. "बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीनि दिन बीति, बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति ।। भावार्थ:- इधर तीन दिन बीत गए, किंतु जड़ समुद्र विनय नहीं मानता । तब श्री राम...

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वाल्मीकि रामायण  भाग 18

वाल्मीकि रामायण  भाग 18 श्रीराम के पीछे-पीछे जो अयोध्यावासी तमसा नदी के तट तक आ गए थे, वे अगली सुबह जागने पर श्रीराम को वहाँ न पाकर अत्यंत व्याकुल हो गए। उन्होंने आस-पास बहुत खोजा, किन्तु उन्हें श्रीराम, लक्ष्मण, सीता...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-303

जय श्री राधे कृष्ण ….. "रिषि अगस्ति कीं साप भवानी, राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी, बंदि राम पद बारहिं बारा, मुनि निज आश्रम कहुँ पगु धारा ।। भावार्थ:- (शिव जी कहते हैं) हे भवानी ! वह ज्ञानी मुनि था, अगस्त...

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वाल्मीकि रामायण  भाग 17

वाल्मीकि रामायण  भाग 17 दशरथ जी की आज्ञानुसार तुरंत ही जाकर सुमन्त्र जी उत्तम घोड़ों से जुता हुआ एक स्वर्णाभूषित रथ ले आए। तब श्रीराम ने हाथ जोड़कर अपनी माता कौसल्या से कहा, “माँ! तुम पिताजी को देखकर यह न...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-302

जय श्री राधे कृष्ण ….. "नाइ चरन सिरु चला सो तहाँ, कृपासिंधु रघुनायक जहाँ, करि प्रनामु निज कथा सुनाई, राम कृपा आपनि गति पाई ।। भावार्थ:- वह भी (विभीषण की भाँति) चरणों में सिर नवा कर वहीं चला, जहाँ कृपा...

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वाल्मीकि रामायण भाग 15

वाल्मीकि रामायण भाग 16सीता के साथ श्रीराम व लक्ष्मण अब अपने पिता का दर्शन करने के लिए गए। उन दोनों भाइयों के धनुष व अन्य आयुध लेकर दो सेवक भी उनके साथ-साथ चल रहे थे। उन आयुधों को फूल-मालाओं से...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-301

जय श्री राधे कृष्ण ….. "जनकसुता रघुनाथहि दीजे, एतना कहा मोर प्रभु कीजे, जब तेहिं कहा देन बैदेही, चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही ।। भावार्थ:- जानकी जी श्री रघुनाथ जी को दे दीजिए। हे प्रभु इतना कहना मेरा कीजिए ।...

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वाल्मीकि रामायण भाग 15

वाल्मीकि रामायण भाग 14माता कैकेयी के कठोर वचन सुनकर भी श्रीराम व्यथित नहीं हुए। उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा! मैं महाराज की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए आज ही वन को चला जाऊँगा। मेरे मन में केवल इतना ही दुःख है...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-300

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अति कोमल रघुबीर सुभाऊ, जद्यपि अखिल लोक कर राऊ, मिलत कृपा तुम्ह पर प्रभु करिही, उर अपराध न एकउ धरिही ।। भावार्थ:- यद्यपि श्री रघुवीर समस्त लोकों के स्वामी हैं, पर उन का स्वभाव अत्यंत...

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वाल्मीकि रामायण भाग 14

वाल्मीकि रामायण भाग 13रात बीती और पुष्य नक्षत्र में राज्याभिषेक का शुभ मुहूर्त आ गया। अपने शिष्यों के साथ महर्षि वसिष्ठ राज्याभिषेक की आवश्यक सामग्री लेकर राजा दशरथ के अंतःपुर में पहुंचे। उन्होंने मंत्री सुमन्त्र से कहा, "सूत! तुम शीघ्र...

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