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Lalit Tripathi

Lalit Tripathi
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सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा
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न माया मिली न राम

न माया मिली न राम किसी गाँव में दो दोस्त रहते थे। एक का नाम हीरा था और दूसरे का मोती। दोनों में गहरी दोस्ती थी और वे बचपन से ही खेलना-कूदना, पढना- लिखना हर काम साथ करते आ रहे...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-229

जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा, vकहइ कपीस सुनहु नरनाहा, जानि न जाइ निसाचर माया, कामरुप केहि कारन आया ।। भावार्थ:- प्रभु श्रीराम जी ने कहा - हे मित्र! तुम क्या समझते हो (तुम्हारी क्या राय...

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सदा सुहागन रहो

सदा सुहागन रहो मीना की दादी गांव से आई तो मीना की मां किरन ने जैसे अपनी सास के पैरों को हाथ लगाया तो उसकी सास ने किरन को "सदा सुहागन रहो" का आशीर्वाद दिया! यह सब मीना बहुत बार...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-228

जय श्री राधे कृष्ण ….. "कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा, कहइ कपीस सुनहु नरनाहा, जानि न जाइ निसाचर माया, कामरुप केहि कारन आया ।। भावार्थ:- प्रभु श्रीराम जी ने कहा - हे मित्र! तुम क्या समझते हो (तुम्हारी क्या राय...

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भक्ति-और-भगवान

भक्ति-और-भगवान एक राजा था जो एक आश्रम को संरक्षण दे रहा था यह आश्रम एक जंगल में था इसके आकार और इसमें रहने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही थी और इसलिए राजा उस आश्रम के लोगों...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-227

जय श्री राधे कृष्ण ….. "ताहि राखि कपीस पहिं आए, समाचार सब ताहि सुनाए, कह सुग्रीव सुनहु रघुराई, आवा मिलन दसानन भाई ।। भावार्थ :- उन्हें (पहरे पर) ठहराकर वे सुग्रीव के पास आये और उनको सब समाचार कह सुनाये...

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मानव चरित्र

मानव चरित्र एक बार एक जिज्ञासु व्यक्ति ने एक संत से प्रश्न किया, “महाराज, रंग रूप, बनावट प्रकृति में एक जैसे होते हुए भी कुछ लोग अत्यधिक उन्नति करते हैं। जबकि कुछ लोग पतन के गर्त में डूब जाते हैं।...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-226

जय श्री राधे कृष्ण ….. "एहि बिधि करत सप्रेम बिचारा, आयउ सपदि सिंधु एहिं पारा, कपिन्ह बिभीषनु आवत देखा, जाना कोउ रिपु दूत बिसेषा ।। भावार्थ:- इस प्रकार प्रेम सहित विचार करते हुए वे शीघ्र ही समुद्र के इस पार...

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परमेश्वर के चरणों में प्रार्थना

कृतज्ञता - परमेश्वर के चरणों में प्रार्थना कोई भी आवेदन नहीं किया था, किसी की भी सिफारिश नहीं थी, ऐसा कोई असामान्य कार्य भी नहीं है, फिर भी सिर के बालों से लेकर पैर के अंगूठे तक 24 घंटे भगवान,...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-225

जय श्री राधे कृष्ण ….. "जिन्ह पायन्ह के पादुकन्हि भरतु रहे मन लाइ, ते पद आजु बिलोकिहउँ इन्ह नयनन्हि अब जाइ ।। भावार्थ:- जिन चरणों की पादुकाओं में भरत जी ने अपना मन लगा रखा है, अहा ! आज मैं...

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