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जब सब खत्म लगे… तभी शुरू होता है असली साहस

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जब सब खत्म लगे… तभी शुरू होता है असली साहस

एक समय की बात है, एक पराक्रमी राजा अपने न्याय और दया के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। एक दिन उसकी सेवा से प्रसन्न होकर एक संत ने उसे एक ताबीज भेंट किया। ताबीज देते हुए संत ने गंभीर स्वर में कहा, “राजन, इसे अपने गले में धारण करो। लेकिन इसे खोलना तभी, जब जीवन में ऐसा समय आए जब तुम्हें लगे कि अब सब समाप्त हो गया है, कोई आशा शेष नहीं है।” राजा ने उस ताबीज को आदरपूर्वक स्वीकार किया और हमेशा अपने पास रखने लगा। समय बीतता गया और राजा अपने कार्यों में व्यस्त हो गया।

एक दिन वह अपने सैनिकों के साथ शिकार पर निकला। जंगल बहुत घना और खतरनाक था। शिकार का पीछा करते-करते राजा अपने साथियों से बिछड़ गया और अनजाने में दुश्मन राज्य की सीमा में प्रवेश कर गया। सांझ ढलने लगी थी, अंधेरा बढ़ रहा था और तभी उसे घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई दी। दुश्मन सैनिक उसकी ओर बढ़ रहे थे। घबराकर राजा ने अपने घोड़े को तेजी से दौड़ाया, परंतु थकान और भूख-प्यास के कारण उसकी गति धीमी पड़ने लगी।

भागते-भागते उसे पेड़ों के बीच एक छोटी सी गुफा दिखाई दी। उसने तुरंत वहां शरण ली और खुद को छिपा लिया। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, सांसें थम सी गई थीं। दुश्मन सैनिकों की आवाजें पास आती जा रही थीं। उस क्षण राजा को लगा कि अब उसका अंत निश्चित है। निराशा और भय ने उसे पूरी तरह घेर लिया। उसे अपनी हार और मृत्यु साफ दिखाई देने लगी।

तभी अचानक उसका हाथ अपने गले में पड़े ताबीज पर गया। उसे संत की बात याद आई। कांपते हाथों से उसने ताबीज खोला और उसमें रखा छोटा सा कागज निकाला। जब उसने उसे पढ़ा, तो उस पर लिखा था — यह भी कट जाएगा।”

इन चार शब्दों ने जैसे उसके भीतर नई ऊर्जा भर दी। उसके मन का भय धीरे-धीरे शांत होने लगा। उसे लगा कि यह कठिन समय भी स्थायी नहीं है, यह भी बीत जाएगा। उसके भीतर एक अद्भुत शांति और विश्वास जाग उठा। वह स्थिर होकर बैठ गया और अपने मन को संभाल लिया। कुछ देर बाद घोड़ों की टापों की आवाज धीरे-धीरे दूर चली गई। दुश्मन सैनिक बिना उसे देखे आगे निकल गए।

रात गहराने के बाद राजा गुफा से बाहर निकला और सावधानीपूर्वक रास्ता तय करते हुए अपने राज्य लौट आया। इस घटना ने उसके जीवन की सोच को बदल दिया। अब वह हर कठिन परिस्थिति में घबराने के बजाय धैर्य और विश्वास बनाए रखता था।

यह कहानी केवल उस राजा की नहीं, बल्कि हम सभी की है। जीवन में ऐसे पल आते हैं जब समस्याएं हमें चारों ओर से घेर लेती हैं। हमें लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, सब खत्म हो गया है। लेकिन सच यह है कि कोई भी परिस्थिति स्थायी नहीं होती। चाहे दुख हो या सुख, हर दौर गुजर जाता है।

जब भी जीवन में अंधेरा छा जाए, बस कुछ पल ठहरिए, गहरी सांस लीजिए और खुद से कहिए — “यह भी कट जाएगा।” यही विचार आपको अंदर से मजबूत बनाएगा और कठिन समय से बाहर निकलने की शक्ति देगा। याद रखिए, जो आज असंभव लगता है, वही कल आपकी सबसे बड़ी सीख बन सकता है।

जय श्रीराम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
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