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कड़वाहट

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कड़वाहट

एक शादी में किशोर ने देखा कि दो बुजुर्ग भाई साथ बैठकर खाना खा रहे हैं। बड़ा भाई अधिक वृद्ध था, इसलिए छोटा भाई बड़े लाड से उसे अपने हाथों से निवाला खिला रहा था। यह मंज़र देखते ही किशोर का दिल भर आया। उसे अपने बड़े भाई की याद आ गई, जिनसे पिछले दस सालों से ज़मीन-जायदाद के बँटवारे को लेकर कोर्ट में मुकदमा चल रहा था।

किशोर ने तुरंत भाई को फोन मिलाया। उधर से कड़क आवाज़ आई, फोन क्यों किया, जो कहना है परसों कोर्ट की पेशी में कहना !” किशोर अपने आँसू रोकते हुए बोला, “भैया, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं आज ही अपना केस वापस ले रहा हूँ। ज़मीन, दुकान सब आप रख लो, मुझे बस मेरा वह भाई लौटा दो, जो बचपन में मेरी एक खरोंच पर दुनिया से लड़ जाता था।” इतना कहकर वह फफक पड़ा। दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया।

 फिर बड़े भाई की सिसकियों की आवाज़ आई वे भर्राए गले से बोले, “पगले, इतने प्यार से पहले बोल देता तो मैं अपना सब कुछ तुझे दे देता। चल, सब छोड़ और अभी घर आ जा, मैं तेरी भाभी से तेरा पसंदीदा खाना बनवाता हूँ।” दस साल की कड़वाहट एक ही पल में बह गई।

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जय श्रीराम

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Lalit Tripathi
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