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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-164

जय श्री राधे कृष्ण ……. "अवगुन एक मोर मैं माना, बिछुरत प्रान न कीन्ह पयाना, नाथ सो नयनन्हि को अपराधा, निसरत प्रान करहिं हठि बाधा ।। भावार्थ:- हाँ, एक दोष मैं अपना अवश्य मानती हूँ कि आपका वियोग होते ही...

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संघर्ष जरूरी है

संघर्ष जरूरी है नीति शास्त्र कहते हैं कि अधम श्रेणी के मनुष्य- कठिनाइयों के भय से किसी उत्तम कार्य को...

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अनमोल सुख

अनमोल सुख हम सुख के पीछे भाग रहे है पर सुख और कहीं नहीं हमारे अंदर ही छुपा है एक...

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बूढ़ा पिता

बूढ़ा पिता  गाँव में एक बूढ़ा व्यक्ति अपने बेटे और बहु के साथ रहता था । परिवार सुखी संपन्न था...

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