आनन्द तो राजा की रानी बनने में है
एक बार दो स्त्रियों के बीच चर्चा हो रही थी। पहली स्त्री ने गर्व से कहा, “मैं अपने पति को अपनी उंगलियों पर नचाती हूँ। मेरी आज्ञा के बिना वो एक कदम भी नहीं चलता। कठपुतली बनाकर रखती हूं।”
यह सुनकर दूसरी स्त्री मुस्कुराई और बोली, “मैं अपने पति को एक पेड़ मानती हूँ। और खुद को उसकी ‘जड़’। जड़ें कभी दिखाई नही देतीं, मगर उसको उखड़ने नहीं देती। जब जीवन में तूफान आते हैं, तो मैं उन्हें मजबूती से थामे रखती हूँ ताकि वे डगमगाएं नहीं।
जब वे उन्नति का फल पाते हैं, तो मुझे उनकी छाया में सुकून मिलता है। वो मेरे घर के कुबेर हैं और मैं उनकी अन्नपूर्णा ।। उन्हें कठपुतली बना कर अपना गुलाम बनाने की बजाय मै उन्हें राजा बना कर रखती हूं। फिर उनकी रानी बन जाती हूं। गुलाम की पत्नी बनने में उतना मजा कहां है बहन, जितना शुकून अपने राजा कि रानी बनने में है। इतना सुनते ही वो स्त्री शर्म से सिर झुका कर वहाँ से चली गई।
जय श्रीराम
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