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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-215

जय श्री राधे कृष्ण ….. "तात चरन गहि मागउँ राखहु मोर दुलार, सीता देहु राम कहुँ अहित न होइ तुम्हार ।। भावार्थ:- हे तात! मैं चरण पकड़ कर आप से भीख माँगता हूँ (विनती करता हूँ), कि आप मेरा दुलार...

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आज वो घर पर है

आज वो घर पर है घर जाने के लिए निकला। अशांत और विचलित मन लिए सब्जी मंडी पहुँचा कुछ सब्जियाँ...

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आटा आधा किलो

आटा आधा किलो एक दिन एक सेठ जी को अपनी सम्पत्ति के मूल्य निर्धारण की इच्छा हुई लेखाधिकारी को तुरन्त...

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संत महिमा

संत महिमा एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे। एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता...

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