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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-215

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जय श्री राधे कृष्ण …..

तात चरन गहि मागउँ राखहु मोर दुलार, सीता देहु राम कहुँ अहित न होइ तुम्हार ।।

भावार्थ:– हे तात! मैं चरण पकड़ कर आप से भीख माँगता हूँ (विनती करता हूँ), कि आप मेरा दुलार रखिये (मुझ बालक के आग्रह को स्नेह पूर्वक स्वीकार कीजिये) । श्री राम जी को सीता जी दे दीजिए, जिस से आप का अहित न हो……!!

दीन दयाल बिरिदु संभारी ।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

सुप्रभात

आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो..

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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