lalittripathi@rediffmail.com
Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-225

जय श्री राधे कृष्ण ….. "जिन्ह पायन्ह के पादुकन्हि भरतु रहे मन लाइ, ते पद आजु बिलोकिहउँ इन्ह नयनन्हि अब जाइ ।। भावार्थ:- जिन चरणों की पादुकाओं में भरत जी ने अपना मन लगा रखा है, अहा ! आज मैं...

Stories

प्रभु प्रेम

प्रभु प्रेम उड़ीसा में बैंगन बेचनेवाले की एक बालिका थी । दुनिया की दृष्टि से उसमें कोई अच्छाई नहीं थी...

1 145 146 147 282
Page 146 of 282