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Quotes

सुविचार-सुन्दरकाण्ड-288

जय श्री राधे कृष्ण ….. "अस मैं सुना श्रवन दसकंधर, पदुम अठारह जूथप बंदर, नाथ कटक महँ सो कपि नाहीं, जो न तुम्हहि जीतै रन माहीं ।। भावार्थ:- हे दशग्रीव! मैंने कानों से ऐसा सुना है कि अठारह पद्म तो...

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भाई- भाई

भाई- भाई बचपन मे भाई के लिए जान देने वाला भाई ही क्यों बड़े होकर भाई का दुश्मन बन जाता...

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जीवन का पासवर्ड

जीवन का पासवर्डवह मेरे आफिस के दिन की एक साधारण शुरुआत थी ,जब मैं अपने आफिस के कंप्यूटर के सामने...

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