हृदय से क्षमा
हृदय से क्षमा समाप्त होते वर्ष 2025 में, मेरे मन, कर्म और वाणी से यदि जाने-अनजाने किसी को ठेस पहुँची हो, किसी का दिल दुखा हो, किसी की उम्मीद टूट गई हो – तो मैं हृदय से क्षमा माँगता हूँ।...
हृदय से क्षमा समाप्त होते वर्ष 2025 में, मेरे मन, कर्म और वाणी से यदि जाने-अनजाने किसी को ठेस पहुँची हो, किसी का दिल दुखा हो, किसी की उम्मीद टूट गई हो – तो मैं हृदय से क्षमा माँगता हूँ।...
सम्मान किस में है एक राजा ने किसी कारण से अपनी सेना के एक सेनापति से रुष्ट होकर उसे पदच्युत करके सूबेदार बना दिया। समय बीतने पर उसे सूबेदार को राजा के सम्मुख उपस्थित होना पड़ा। राजा ने पूछा- मैं...
परम भक्त नरसी जी की कथा आज से लगभग 500-600 वर्ष पहले की बात है। एक नरसी नाम के श्रीकृष्ण जी के परम भक्त थे। परंतु थे बहुत ही कंजूस और 56 करोड़ की संपत्ति के मालिक थे। परमात्मा कहते...
आपका मूल्य एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो...
सुख की खोज जीवन में आत्मसंतुष्टि एवं विवेक के अभाव में एक धनवान व्यक्ति भी उतना ही दुःखी हो सकता है, जितना एक निर्धन व्यक्ति और आंतरिक समझ की बदौलत एक निर्धन व्यक्ति भी उतना सुखी हो सकता है जितना...
जिनके भगवान भी ॠणी हैं एक भक्त थे। उन्होंने भगवान का नाम जपते हुए जीवन बिता दिया पर भगवान से कभी कुछ नहीं माँगा। एक दिन वे भक्त बिहारी जी के मंदिर गए। पर यह क्या वहाँ उन्हें भगवान नहीं...
सलाह एक व्यक्ति ने अगरबत्ती की दुकान खोली। नाना प्रकार की अगरबत्तियां थीं। उसने दुकान के बाहर एक साइन बोर्ड लगाया- "यहाँ सुगन्धित अगरबत्तियां मिलती हैं।" दुकान चल निकली। एक दिन एक ग्राहक उसके दुकान पर आया और कहा- आपने...
ऊंट किस करवट बैठे एक मनिहारी थी चूड़ी बेचा करती थी और एक सब्जी वाला था। दोनों बाजार गए और दोनों ने अपना अपना सामान खरीदा। उन दिनों ऊंट पर सामान लादकर लोग ले जाया करते थे। सब्जी वाला एक...
टेढ़ी उंगली एक 81 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने बिस्तर पर लेटते हुए अपने 83 वर्षीय बुजुर्ग पति से कहा :"सुनो .. मैंने अभी खिड़की से बाहर देखा और मुझे लगा कि गैरेज की लाइट जल रही है। क्या आप जाकर...
शबरी होना यहाँ शबरी किसी नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अवस्था है। शबरी वह है जो प्रतीक्षा करना जानती है—बिना शिकायत, बिना अपेक्षा, बिना शर्त। सब्र यहाँ मजबूरी नहीं, बल्कि आंतरिक स्थिरता है।ऐसा सब्र जिसमें मन शांत रहता...