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धन्यवाद

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धन्यवाद

एक व्यक्ति को हमेशा शिकायत करने की आदत थी। मौसम ठीक न हो तो शिकायत, काम ज़्यादा हो तो शिकायत, लोग समझ न पाएं तो शिकायत। उसे लगता था कि उसके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं है।

एक दिन वह एक मंदिर के बाहर बैठा अपनी परेशानियाँ गिन रहा था। वहीं पास में एक साधु शांत भाव से बैठा मुस्कुरा रहा था। व्यक्ति ने उनसे कहा, “मेरे जीवन में तो बस समस्याएँ ही समस्याएँ हैं।”

साधु ने उससे पूछा, “आज सुबह आँख खुली?”

“हाँ।”

“खाना मिला?”

“हाँ।”

“चलने के लिए पैर, देखने के लिए आँखें हैं?”

वह चुप हो गया।

साधु बोले, “जिसके पास इतना कुछ है, अगर वह सिर्फ न होने वाली चीज़ों को देखेगा, तो दुखी ही रहेगा। लेकिन जो मिला है उसके लिए धन्यवाद करेगा, वही सच्चा सुर पाएगा।”

उस दिन उस व्यक्ति ने एक नया अभ्यास शुरू किया। हर रात सोने से पहले वह तीन बातों के लिए धन्यवाद कहता। धीरे-धीरे उसकी शिकायतें कम होने लगीं। उसका मन हल्का रहने लगा, रिश्ते सुधरने लगे और जीवन में शांति आले लगी।

उसने समझ लिया था-शिकायतें कम और धन्यवाद अधिक करने से ही जीवन सुंदर बनता है।

धन्यवाद

जय श्री राम

Lalit Tripathi
the authorLalit Tripathi
सामान्य (ऑर्डिनरी) इंसान की असमान्य (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी) इंसान बनने की यात्रा

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