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ठाकुर का आसन

ठाकुर का आसन गढ़ के बड़े चबूतरे पर संगमरमर के नक्काशीदार मयूरासन पर ठाकुर बैठा था। चबूतरे पर कश्मीरी गलीचा बिछा था। पास ही फर्श पर चौधरी बैठा था। ठाकुर बिना बात ही भगवान जाने आज क्यों बहुत खुश था।...

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भक्त का प्रेम

भक्त का प्रेम बंगाल के एक परम भक्त थे रामदास। उनका अटूट नियम था कि वे हर एकादशी पर बंगाल से पैदल चलकर जगन्नाथ पुरी पहुँचते थे। वहाँ समुद्र स्नान के बाद वे प्रभु का महा प्रसाद ग्रहण करते और...

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कर्म से बदल जाते हैं भाग्य

कर्म से बदल जाते हैं भाग्य प्रकृत्य ऋषि का रोज का नियम था कि वह नगर से दूर जंगलों में स्थित शिव मंदिर में भगवान् शिव की पूजा में लींन रहते थे. कई वर्षो से यह उनका अखंड नियम था।...

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एक दिन देख लूंगा

एक दिन देख लूंगा एक समय की बात है। राजस्थान के रामदेवड़ा गांव में नाहर सिंह साहूकार रहता था। साहूकार छोटी-छोटी बातों पर नाराज़ हो जाता था। उसका एक नौकर था छंगा! छंगा के एक पांव में छह उंगलियां थीं।...

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इन 4 महिलाओं का हर हाल में सम्मान करना चाहिए

इन 4 महिलाओं का हर हाल में सम्मान करना चाहिए तुलसीदासजी द्वारा रचित रामचरित मानस नीति-शिक्षा का एक महत्मपूर्ण ग्रंथ है। इसमें बताई गई कई बातें और नीतियां मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती हैं। जिनका पालन करके मनुष्य...

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सच्ची ईमानदारी का फल

सच्ची ईमानदारी का फल एक छोटे से गांव में मोहन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। उसके पिता मजदूरी करते थे और घर की हालत बहुत साधारण थी। मोहन रोज सुबह स्कूल जाता और शाम को अपने पिता की...

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जाग उठा परोपकार

जाग उठा परोपकार एक समय की बात है। गंगानगर गांव में राजू नामक एक व्यक्ति रहता था। गांव में आपसी भाईचारा और प्रेम बहुत था। इसलिए वहां के सभी समुदाय के लोग आपस में मिलजुल कर रहा करते थे। राजू...

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पुण्यों का मोल

पुण्यों का मोल दान से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है और साथ ही जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल भी नष्ट हो जाते हैं। शास्त्रों में दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस पुण्य कर्म में समाज...

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स्वयं के धर्म की चिंता

स्वयं के धर्म की चिंता एक आदमी तालाब के किनारे बैठ कर कुछ सोच रहा था । तभी उसने एक पानी में किसी के डूबने की आवाज सुनी और उसने तालाब की तरफ देखा तो उसे एक बिच्छू तालाब में...

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गीता पर शपथ क्यों दिलाई जाती है

गीता पर शपथ क्यों दिलाई जाती है कथा कुछ इस प्रकार से है- भगवान श्रीहरि मूर दैत्य का नाश करने के बाद बैकुंठ लोक में शेष शय्या पर आंखें मूंदे लेटे मन ही मन मुस्कुरा रहे थे….देवी लक्ष्मी उनकी चरण...

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