ईश्वर पर छोड़ दो..….सुख पाओगे
ईश्वर पर छोड़ दो..….सुख पाओगे एक बहुत अरबपति महिला ने एक गरीब चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, पोट्रट बनवाया। चित्र बन गया, तो वह अमीर महिला अपना चित्र लेने आयी। वह बहुत खुश थी। चित्रकार से उसने कहा, कि क्या...
ईश्वर पर छोड़ दो..….सुख पाओगे एक बहुत अरबपति महिला ने एक गरीब चित्रकार से अपना चित्र बनवाया, पोट्रट बनवाया। चित्र बन गया, तो वह अमीर महिला अपना चित्र लेने आयी। वह बहुत खुश थी। चित्रकार से उसने कहा, कि क्या...
मर्यादा की डोर सुबह का समय था। कॉलेज का गेट खुल चुका था और छात्र-छात्राओं की भीड़ अंदर जा रही थी। हर दिन की तरह आज भी प्रोफेसर अभय कस्वां अपनी कक्षा की ओर बढ़ रहे थे। रास्ते में उनकी...
भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन के सारथी क्यों बने थे पीतांबरधारी चक्रधर भगवान श्री कृष्ण महाभारत युद्ध में सारथी की भूमिका में थे। उन्होंने अपनी यह भूमिका स्वयं चयन की थी। अपने सुदर्शन चक्र से समस्त सृष्टि को क्षण भर में...
एक पागल भिखारी जब बुढ़ापे में अकेला ही रहना है तो औलाद क्यों पैदा करें उन्हें क्यों काबिल बनाएं जो हमें बुढ़ापे में दर-दर के ठोकरें खाने के लिए छोड़ दे । क्यों दुनिया मरती है औलाद के लिए, जरा...
शब्दों का घाव एक बार एक लकड़हारा एक जंगल में लकड़ी काटने गया। लकड़हारे ने जैसे ही पेड़ काटना शुरू किया उसे एक गुर्राने की आवाज़ सुनाई पड़ी। उसने देखा की एक शेर पेड़ के नीचे बैठा है। बेचारा लकड़हारा...
भगवान हमारे दिल में रहते है एक दिन एक दंपत्ति अपने 10 साल के बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास आए । उन्होंने फ़ाइल डॉक्टर साहब की टेबल पर रखी। डॉक्टर ने फ़ाइल देखी और बच्चे की जाँच की। फिर...
दुःख (लिप्त या निर्लिप्त) शहर का सबसे ख़ूबसूरत, आलीशान घर! कोई भी उसे देखता, तो उसकी तारीफ़ किये बिना नहीं रह पाता। एक बार घर का मालिक किसी काम से कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर चला गया। कुछ...
बस कभी बीमार मत पड़ो एक भक्ति में जुड़ी हुई आत्मा से मिला,पहले मैंने अपनी उम्र बताई। फिर मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा 95 साल । उनके पिता का भी 105 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। मैंने...
संगत का प्रभाव दो दोस्त थे, एक सज्जन पुरुष, दूसरा जरा बदमाश किस्म का। सज्जन संत हो गए, प्रखर वक्ता के रूप में पूजे जाने लगे। दूसरा दोस्त इधर-उधर चोरी-चकारी हाथ सफाई कर अपना जीवनयापन करने लगा। एक दिन संत...
धर्म-युद्ध हस्तिनापुर में पाण्डवों के राज्याभिषेक के बाद जब कृष्ण द्वारिका जाने लगे तो धर्मराज युद्धिष्ठर उनके रथ पर सवार हो कर कुछ दूर तक उन्हें छोड़ने के लिए चले गए। भगवान श्रीकृष्ण ने देखा, धर्मराज के मुख पर उदासी...