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साक्षात्कार/Interview

बात बात में मां बाप का टोकना हमें अखरता है । हम भीतर ही भीतर झल्लाते है कि कब इनके टोकने की आदत से हमारा पीछा जुटेगा । लेकिन हम ये भूल जाते है कि उनके टोकने से जो संस्कार...

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अपेक्षा रहित सेवा- प्रभु की नजरों में सम्मानित

जगत से अपेक्षा रखकर की गई कोई भी सेवा एक ना एक दिन निराशा का कारण अवश्य बन जाती है। यदि जीवन में अवसर मिले तो सेवा सभी की करना मगर आशा किसी से भी मत रखना क्योंकि सेवा का...

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इकलौता चिराग -पियूष

इकलौता चिराग -पियूष पीयूष बेटा तेरे पिता तुझे बहुत याद कर रहे हैं अंतिम समय में तुझे देखना चाहते हैं एक बार आ जा बेटा....दमयंती जी करुणा विगलित स्वर में अपने इकलौते चिराग पियूष से प्रार्थना कर रहीं थीं। मां...

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छोटी-शुरूवात-बड़ी-सफलता

छोटी-शुरूवात-बड़ी-सफलताएक बार एक गांव मे निर्धन परिवार रहता था। परिवार की हालात इतनी तंगी थी कि उसके खाने पीने के भी लाले पडे हुए थे। परिवार सिर्फ तीन ही लोगों का था। पती पत्नि और बेटा । पती को कोई...

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समय रहते अपना घर बना लें

             एक निर्धन विद्वान व्यक्ति चलते चलते पड़ोसी राज्य में पहुँचा। संयोग से उस दिन वहाँ हस्तिपटबंधन समारोह था जिसमें एक हाथी की सूंड में माला देकर नगर में घुमाया जाता था। वह जिसके गले में माला डाल देता था...

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रिश्तों को परखिये मत

रिश्तों को लेकर बहुत कठोर मापदंड मत बनाइए। सामने वाले को एक-एक चीज़ पर परखिये मत। हो सकता है कोई दोस्त बहुत बौद्धिक हो मगर तारीफ करना न जानता हो। हो सकता है कोई ईर्ष्या करता है मगर सबसे सही...

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”खीर”

बेटा सुबह दस बजे खाना खाकर चला जाता था, बूढ़े पिताजी को आँख से न के बराबर दिखाई देता था। पिताजी दोपहर में खाना खाते थे। इत्तेफाकन एक दिन जैसे ही बेटा खाने बैठा, पिता को आवाज लगा दी —...

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हमारा शरीर – इस जिंदगी का वाहन

मैं किसी आफिस काम के लिए फ्लाइट से बैंगलोर से मुम्बई जा रहा था। यह विमान का इकोनॉमी क्लास था। जैसे ही मैं प्लेन में चढ़ा, मैंने अपना हैंड बैग ओवरहेड केबिन में रख दिया और अपनी सीट पर बैठ...

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जीवन की यात्रा का आनंद कैसे ले!

कभी आपको किसी यात्रा के दौरान, बस की सबसे पीछे वाली सीट पर बैठने का अवसर मिला है ? यदि नही; तो कभी गौर करना और हाँ तो आपने महसूस किया होगा कि पीछे की सीट पर धक्के ज्यादा महसूस...

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मन की दशा

एक बार एक सेठ ने पंडित जी को निमंत्रण किया पर पंडित जी का एकादशी का व्रत था तो पंडित जी नहीं जा सके पर पंडित जी ने अपने दो शिष्यो को सेठ के यहाँ भोजन के लिए भेज दिया..। ...

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