सुविचार
जय श्री राधे कृष्ण ……. " प्रयत्न करने से कभी न चूकें, हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं, विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. " प्रयत्न करने से कभी न चूकें, हिम्मत नहीं तो प्रतिष्ठा नहीं, विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं….!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनि रावन पठए भट नाना, तिन्हहि देखि गर्जेउ हनुमाना, सब रजनीचर कपि संघारे, गए पुकारत कछु अधमारे…..!! भावार्थ:- यह सुनकर रावण ने बहुत से योद्धा भेजे । उन्हें देखकर हनुमान जी ने गर्जना की ।...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "नाथ एक आवा कपि भारी, तेहिं असोक वाटिका उजारी, खाएसि फल अरु बिटप उपारे, रच्छक मर्दि मर्दि महि डारे…..!! भावार्थ:- (और कहा) हे नाथ ! एक बड़ा भारी बन्दर आया है । उसने अशोक वाटिका...
जैकेट का सही माप शर्मा जी सुबह सुबह अपने दफ़्तर के लिए निकलने वाले थे। तभी अचानक क्षितिज ने एक पैकेट उनके सामने कर दिया..पापा ! वापस करना है ये जैकेट….‛क्यों?’…..‛फिट नहीं हो रहा..ज़्यादा टाइट है।’ लंच बॉक्स देते हुए...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा, फल खाएसि तरुतोरैं लागा, रहे जहाँ बहु भट रखवारे, कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे ।। भावार्थ:- वे सीता जी को सिर नवा कर चले और बाग में घुस गये ।...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "तिन्ह कर भय माता मोहि नाही, जौ तुम्ह सुख मानहु मन माही……!! भावार्थ: - (हनुमान जी ने कहा) हे माता! यदि आप मन में सुख मानें (प्रसन्न होकर आज्ञा दें) तो मुझे उनका भय तो...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "*सदा दूसरों के कामों को *प्रोत्साहन* दें और उनकी हर संभव मदद करें तभी हमारी गिनती सज्जन लोगों मैं की जाएगी…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. "सुनहु मातु मोहि अतिसय भूखा, लागि देखि सुन्दर फल रुखा, सुनु सुत करहिं बिपिन रखवारी, परम सुभट रजनीचर भारी…..!! भावार्थ:- हे माता ! सुनो, सुंदर फल वाले वृक्षों को देखकर मुझे बड़ी ही भूख लग...
जय श्री राधे कृष्ण ……. "जीवन में कितनी भी विपत्ती आये अपना संयम रखना चाहिए क्योंकि कैसी भी विपत्ती हो सामना आपको ही करना है…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....
जय श्री राधे कृष्ण ……. "बार बार नाएसि पद सीसा, बोला बचन जोरि कर कीसा, अब कृतकृत्य भयउँ मैं माता, आसिस तव अमोघ बिख्याता…..!! भावार्थ:- हनुमान जी ने बार-बार सीता जी के चरणों में सिर नवाया और फिर हाथ जोड़...