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लोकमंगल की अयोध्या-    लोकतंत्रीय पुरुषोत्तम

लोकमंगल की अयोध्या-    लोकतंत्रीय पुरुषोत्तम वाल्मीकि रामायण में मारीच कहता है:- "रामो विग्रहवान् धर्मः।" यानि राम धर्म के अवतार हैं। इस 'रामधर्म' में राजधर्म, मनुष्य धर्म, युद्ध धर्म की परिभाषा भी अंतर्निहित है। अयोध्या सत्ता के शिखर का प्रतीक थी।...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कोई भी परेशानी वास्तव में उतनी बड़ी नहीं होती जितनी हम उसे बार- बार सोचकर बना देते हैं…!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-70

जय श्री राधे कृष्ण ……. "जीति को सकइ अजय रघुराई, माया ते असि रचि नहिं जाई, सीता मन बिचार कर नाना, मधुर बचन बोलेउ हनुमाना l…..!! भावार्थ:- श्री रघुनाथ जी तो सर्वथा अजेय हैं, उन्हें कौन जीत सकता है ?...

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विश्वास- श्री राम कथा से

श्री राम कथा से सुन्दर स्त्री बाद में शूर्पणखा निकली। सोने का हिरन बाद में मारीच निकला। भिक्षा माँगने वाला साधू बाद में रावण निकला। लंका में तो निशाचार लगातार रूप ही बदलते दिखते थे। हर जगह भ्रम, हर जगह...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-69

जय श्री राधे कृष्ण ……. "तब देखी मुद्रिका मनोहर, राम नाम अंकित अति सुंदर, चकित चितव मुदरी पहिचानी, हरष बिसाद हृदयँ अकुलानी…..!! भावार्थ:- तब उन्होंने राम - नाम से अंकित अत्यंत सुंदर एवं मनोहर अंगूठी देखी । अंगूठी को पहचान...

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अयोध्या

अयोध्याहम सभी जानते हैं कि वैवस्वत मनु महाराज द्वारा सरयू तट पर अयोध्या की स्थापना की गई थी। उसी अयोध्या में त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम का अवतरण (जन्म) हुआ था।…अयोध्या पर हमला करने वाला पहले आक्रांता ग्रीक मिनिएंडर था, जिसे...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-68

जय श्री राधे कृष्ण ……. "कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारि तब, जनु असोक अंगार दीन्ह हरषि उठि कर गहेउ…..!! भावार्थ:- तब हनुमान जी ने हृदय में विचार कर (सीता जी के सामने) अंगूठी डाल दी, मानो अशोक ने...

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भगवान श्री राम की प्राण – प्रतिष्ठा

भगवान श्री राम की प्राण - प्रतिष्ठाभगवान श्री राम लला…. लगभग पांच सौ वर्ष के पश्चात… अपनी जन्म स्थली अवधपुरी में विराजमान हो गए हैं। क्या है प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया…..? आईए जानते हैं।मूर्तिकार की कल्पना…..उंगलियों की जादूगरी…..छेनी की हजारों...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-67

जय श्री राधे कृष्ण ……. "नूतन किसलय अनल समाना, देहि अगिनि जनि करहि निदाना, देखि परम बिरहाकुल सीता, सो छन कपिहि कलप सम बीता….!! भावार्थ:- तेरे नए-नए कोमल पत्ते अग्नि के समान हैं। अग्नि दे, विरह-रोग का अन्त मत कर...

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पौष माह की ऐतिहासिक दीपावली…

पौष माह की ऐतिहासिक दीपावली... मन की गति से उड़ता पुष्पक विमान.... जब अवधपुरी के दर्शनयोग्य... क्षितिज पर पहुंच गया.... तो विह्नल..., अधीर... राम उन दर्शनो को नेत्रस्थ करके.... जैसे बालसम हो गए...., उछल पड़े...! आ गई अवधपुरी...., ओह्ह....! मेरा...

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