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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-27

जय श्री राधे कृष्ण ……. तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग, तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग……!! भावार्थ:- हे तात ! स्वर्ग और मोक्ष के सब सुखों को तराजू के एक पलड़े में रखा जाय,...

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सकारात्मक विचार करें

सकारात्मक विचार करें एक छोटे से खेत में एक जवान लड़का और उसका दादा मिट्टी खोद रहे थे।  वे मिट्टी को पलट रहे थे, उसकी गांठों को तोड़ रहे थे ताकि मिट्टी उस वर्ष की बुवाई के लिए अच्छे से...

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सुविचार

जय श्री राधे कृष्ण "उदासी यानी,अतीत में जीना. तनाव यानी,भविष्य में जीना.आनंद यानी,वर्तमान में जीना"…..!! सुप्रभात आज का दिन प्रसन्नता से परिपूर्ण हो.....

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-26

जय श्री राधे कृष्ण ……. बिकल होसि तैं कपि कें मारे, तब जानेसु निसिचर संघारे, तात मोर अति पुन्य बहूता, देखेउं नयन राम कर दूता……!! भावार्थ:- जब तू बंदर के मारने से व्याकुल हो जाय, तब तू राक्षसों का संहार...

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धर्म और अधर्म क्या है?

धर्म और अधर्म क्या है?  जिस रास्ते पर चलकर मनुष्य स्वंय को आत्मा के रूप में देखता है। भगवान के अंश के रूप में स्वंय को जानता है। उस मार्ग को धर्म कहते हैं।  जब मनुष्य स्वंय को भगवान के...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-25

जय श्री राधे कृष्ण ……. पुनि संभारि उठी सो लंका, जोरि पानि कर बिनय ससंका, जब रावनहिं ब्रम्ह बर दीन्हा, चलत बिरंची कहा मोहि चीन्हा…..!! भावार्थ:- वह लंकिनी फिर अपने को संभाल कर उठी और डर के मारे हाथ जोड़कर...

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स्वाभिमान

स्वाभिमान "पता नहीं ये सामने वाला सेठ हफ्ते में 3-4 बार अपनी चप्पल कैसे तोड़ आता है?" मोची बुदबुदाया, नजर सामने की बड़ी किराना दूकान पर बैठे मोटे सेठ पर थी। हर बार जब उस मोची के पास कोई काम...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-24

जय श्री राधे कृष्ण ……. जानेहिं नहीं मरमु सठ मोरा, मोर अहार जहाँ लगि चोरा, मुठिका एक महा कपि हनी, रुधिर बमत धरनीं ढनमनी…..!! भावार्थ:- हे मूर्ख! तूने मेरा भेद नहीं जाना ? जहां तक (जितने) चोर हैं, वह सब...

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घर वापसी

घर वापसी एक बार एक पुत्र अपने पिता से रूठ कर घर छोड़ कर दूर चला गया और फिर इधर उधर यूँही भटकता रहा। दिन बीते,महीने बीते और साल बीत गए। एक दिन वह बीमार पड़ गया। अपनी झोपडी में...

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सुविचार-सुन्दरकाण्ड-23

जय श्री राधे कृष्ण ……. मसक समान रूप कपि धरी, लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी, नाम लंकिनी एक निसिचरी, सो कह चलेसि मोहि निंदरी……!! भावार्थ:- हनुमान जी मच्छर के समान (छोटा सा) रूप धारण कर नर रूप से लीला करने वाले...

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